नई दिल्ली। भारत ने संयुक्त राष्ट्र (UN) में पाकिस्तान की टिप्पणियों का जवाब देते हुए स्पष्ट किया है कि वह आतंकवादी हमलों को बर्दाश्त नहीं करेगा और परमाणु धमकियों (Nuclear threats) के आगे नहीं झुकेगा। भारत ने कहा कि पहलगाम में 26 नागरिकों की जान लेने वाले आतंकी हमले के बाद की गई सैन्य कार्रवाई आत्मरक्षा में थी। भारत की ओर से प्रथम सचिव अनमोल शेर सिंह बेदी ने जवाब देने के अधिकार का इस्तेमाल करते हुए कहा कि भारत की प्रतिक्रिया संतुलित, लक्षित और तनाव बढ़ाने से बचने वाली थी।
भारत ने यह भी दोहराया कि आतंकवाद को प्रायोजित करने वालों और उसकी साजिश रचने वालों के बीच कोई अंतर नहीं किया जा सकता। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि देश शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन इसके लिए आतंकवाद के जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करना जरूरी है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत ने पाकिस्तान को लेकर अपनी तीन प्रमुख बातें स्पष्ट कीं। पहली, भारत पर किसी भी आतंकवादी हमले का उचित जवाब दिया जाएगा। दूसरी, भारत परमाणु धमकियों या परमाणु ब्लैकमेल के आगे नहीं झुकेगा। तीसरी, आतंकवाद को समर्थन देने वालों और हमलों की साजिश रचने वालों को अलग-अलग करके नहीं देखा जाएगा।
#IndiaAtUN
First Secretary Anmol Sher Singh Bedi exercised 🇮🇳’s right of reply in response to remarks made by Pakistan.
He underlined the following:
➡️ 🇮🇳 acted in self-defence after the Pahalgam terror attack that killed 26 civilians. Our response was measured, targeted and non-escalatory.
➡️ Indus Waters Treaty rested on good faith and goodwill. A State cannot undermine that trust and still insist the privileges flowing from it to stay untouched.
➡️ 🇮🇳 pointed to the A.Q. Khan network, which contributed to the adoption of SCR 1540. India urges all States and responsible suppliers to exercise the highest vigilance on nuclear cooperation and advanced weapons transfers, not because of India, but for their own security.
➡️ 🇮🇳’s military capabilities are defensive, shaped by its own security environment, and not directed against any State.
➡️ Escalation concerns are best judged by conduct, over rhetoric. Nuclear weapons must not be a routine instrument of statecraft. Relying on a nuclear overhang to limit the consequences of sub-conventional activity raises escalation risk, not restraint.
➡️ Crises in the region tend to follow a cycle of provocation, denial of responsibility, then appeals for restraint once a response has been made. Where those in power are neither elected by nor accountable to the people, crisis becomes an instrument of power and instability becomes useful.
➡️ Using force through non-State actors does not erase the State’s responsibility.
➡️ 🇮🇳 has drawn three clear lines: First: Any terrorist attack against India will receive a fitting response; Second: India will not bow to nuclear blackmail; Third: India will make no distinction between those who sponsor terrorism and those who mastermind it.
➡️ 🇮🇳 does not seek conflict and continues to seek peace with all. But without accountability for reckless actions, peace merely becomes a pause between crises.
@PMOIndia @MEAIndia @IndianDiplomacy @PIB_India @airnewsalerts @DDNewslive
— India at UN, NY (@IndiaUNNewYork) October 10, 2026
अनमोल शेर सिंह बेदी ने कहा कि भारत संघर्ष नहीं चाहता और सभी देशों के साथ शांतिपूर्ण संबंध बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि, उन्होंने आगाह किया कि गैर-जिम्मेदाराना कार्रवाइयों के लिए जवाबदेही तय किए बिना स्थायी शांति संभव नहीं है। ऐसा होने पर शांति केवल दो संकटों के बीच का अस्थायी विराम बनकर रह जाएगी।
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में कहा कि पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 नागरिकों की जान गई थी। इसके बाद भारत ने अपनी सुरक्षा के लिए सैन्य कार्रवाई की। भारतीय पक्ष के अनुसार, यह कार्रवाई लक्षित और संतुलित थी तथा इसका उद्देश्य संघर्ष को अनावश्यक रूप से बढ़ाना नहीं था।
भारत ने जोर दिया कि क्षेत्रीय तनाव का आकलन केवल राजनीतिक बयानों के आधार पर नहीं, बल्कि देशों के वास्तविक आचरण के आधार पर किया जाना चाहिए।
भारतीय प्रतिनिधि ने यह भी कहा कि परमाणु हथियारों को सामान्य कूटनीतिक या राजनीतिक दबाव बनाने के साधन के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। परमाणु क्षमता की आड़ में आतंकवादी गतिविधियों के परिणामों को सीमित रखने की कोशिश क्षेत्रीय तनाव बढ़ा सकती है।
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में कहा कि गैर-सरकारी तत्वों के माध्यम से हिंसा कराने से किसी राज्य की जिम्मेदारी समाप्त नहीं हो जाती। भारतीय पक्ष ने आरोप लगाया कि क्षेत्रीय संकटों में अक्सर पहले उकसावे की कार्रवाई होती है, फिर जिम्मेदारी से इनकार किया जाता है और जवाबी कार्रवाई होने पर संयम बरतने की अपील की जाती है।
भारत ने सिंधु जल संधि का उल्लेख करते हुए कहा कि यह समझौता आपसी सद्भावना और विश्वास के आधार पर हुआ था। अनमोल शेर सिंह बेदी ने तर्क दिया कि कोई देश एक ओर उस विश्वास को कमजोर करे और दूसरी ओर संधि से मिलने वाले लाभों को बिना किसी बदलाव के जारी रखने की अपेक्षा करे, यह उचित नहीं है।
इस टिप्पणी के जरिए भारत ने संधि को लेकर अपने रुख को स्पष्ट किया और समझौते के पीछे आपसी विश्वास के महत्व को रेखांकित किया।
भारतीय प्रतिनिधि ने पाकिस्तान के परमाणु वैज्ञानिक ए.क्यू. खान के नेटवर्क का उल्लेख करते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1540 के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने सभी देशों और जिम्मेदार आपूर्तिकर्ताओं से परमाणु सहयोग तथा उन्नत हथियारों के हस्तांतरण के मामलों में अत्यधिक सतर्कता बरतने की अपील की।
उन्होंने कहा कि ऐसी सतर्कता केवल भारत की सुरक्षा के लिए नहीं, बल्कि संबंधित देशों की अपनी सुरक्षा के लिहाज से भी जरूरी है।
भारत ने साथ ही स्पष्ट किया कि उसकी सैन्य क्षमताएं रक्षात्मक प्रकृति की हैं और उन्हें देश के सुरक्षा वातावरण को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। भारतीय पक्ष के मुताबिक, इन क्षमताओं का उद्देश्य किसी अन्य देश को निशाना बनाना नहीं, बल्कि अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
पाकिस्तान में आतंकवादी संगठनों की मौजूदगी और उनके खिलाफ कार्रवाई को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। आतंकवादी संगठनों के नाम बदलकर सक्रिय होने और प्रतिबंधों के बावजूद उनके नेटवर्क के बने रहने की आशंकाएं भी चर्चा में रही हैं।
अल-कायदा के प्रमुख ओसामा बिन लादेन का वर्ष 2011 में पाकिस्तान के एबटाबाद में मिलना इस मुद्दे से जुड़ी प्रमुख घटनाओं में शामिल रहा है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र में अपने बयान के जरिए आतंकवाद के खिलाफ जवाबदेही, परमाणु धमकियों से मुक्त सुरक्षा वातावरण और क्षेत्रीय शांति की आवश्यकता पर जोर दिया।
भारत का स्पष्ट संदेश है कि वह शांति का पक्षधर है, लेकिन आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई करने के अपने अधिकार से पीछे नहीं हटेगा। परमाणु धमकियों के जरिए आतंकवादी गतिविधियों पर जवाबी कार्रवाई रोकने की किसी भी कोशिश को भारत स्वीकार नहीं करेगा।
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