img-fluid

सुरेश रैना ने शारदीय नवरात्र के पहले दिन परिवार संग मां बगलामुखी के दर्शन किए, जानिए हवन में लाल मिर्च चढ़ाने की मान्यता

October 13, 2026

नई दिल्ली ।भारतीय क्रिकेट टीम (Indian Cricket Team) के पूर्व खिलाड़ी सुरेश रैना (Suresh Raina) ने शारदीय नवरात्र (Sharadiya Navratri) के पहले दिन हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) स्थित मां बगलामुखी मंदिर (Maa Baglamukhi Temple) में परिवार के साथ पहुंचकर पूजा-अर्चना की। इस दौरान उनकी पत्नी प्रियंका, मां और बहन भी मौजूद रहीं। परिवार ने विधि-विधान से पूजा की और देवी का आशीर्वाद लिया। रैना ने सभी के सुख, समृद्धि, खुशहाली और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की।

मंदिर में दर्शन के दौरान रैना ने हिमाचल प्रदेश के साथ अपने पुराने और गहरे संबंध का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि मां बगलामुखी के प्रति उनके परिवार की विशेष आस्था है। नवरात्र के पहले दिन देवी के दर्शन करना उनके लिए खास अवसर रहा। इस धार्मिक यात्रा के दौरान उन्होंने मां के दरबार में माथा टेका और परिवार के साथ पूजा-पाठ किया। रैना ने देवी के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए ‘ॐ श्री बगलामुख्यै नमः’ मंत्र भी लिखा।

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित मां बगलामुखी मंदिर को प्रमुख शक्तिपीठों में गिना जाता है। यह धाम पहाड़ियों के बीच स्थित है और यहां वर्षभर श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। नवरात्र के अवसर पर देवी की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि मां बगलामुखी अपने भक्तों को शत्रुओं पर विजय और कठिनाइयों से मुक्ति का आशीर्वाद देती हैं। इसी विश्वास के कारण बड़ी संख्या में लोग यहां पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान कराने आते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां बगलामुखी दस महाविद्याओं में आठवें स्वरूप के रूप में पूजी जाती हैं। उन्हें पीतांबरा देवी भी कहा जाता है। परंपरागत रूप से राजा-महाराजा युद्ध में सफलता और शत्रुओं पर विजय की कामना के लिए देवी की आराधना करते थे। वर्तमान समय में भी श्रद्धालु जीवन की परेशानियों, विरोध और बाधाओं से मुक्ति की प्रार्थना लेकर मंदिर पहुंचते हैं। हालांकि, ये बातें धार्मिक आस्था और परंपराओं से जुड़ी मान्यताओं पर आधारित हैं।

मंदिर की पूजा पद्धति में हवन को महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। यहां हवन सामग्री में लाल मिर्च चढ़ाने की परंपरा भी प्रचलित है। मान्यता के अनुसार, लाल मिर्च को शत्रुओं के प्रभाव को समाप्त करने और विरोधियों पर विजय प्राप्त करने का प्रतीक माना जाता है। इसी विश्वास के चलते देवी के अनुष्ठान में इसका उपयोग किया जाता है। श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति और बाधाओं से छुटकारे की प्रार्थना के साथ हवन कराते हैं। यह परंपरा मां बगलामुखी की उपासना की विशिष्ट पहचान मानी जाती है।


  • धार्मिक परंपरा में मंगलवार का दिन मां बगलामुखी की साधना के लिए विशेष माना गया है। मान्यता है कि इसी दिन देवी का प्राकट्य हुआ था। मंदिर में दिन में दो बार आरती होती है। सुबह 5:30 बजे और रात 8 बजे देवी की आरती की जाती है। मान्यता के अनुसार, भगवान राम ने भी रावण पर विजय प्राप्त करने के उद्देश्य से इस क्षेत्र में तपस्या की थी। यह भी कहा जाता है कि भगवान राम के निर्देश पर हनुमान और भैरव नाथ ने क्षेत्र की रक्षा का दायित्व संभाला था। इसी परंपरा से मंदिर के मुख्य द्वार पर हनुमान और भैरव की प्रतिमाएं स्थापित होने की मान्यता जुड़ी हुई है।

    Share:

  • जापान में 18 अक्टूबर से शुरू होंगे पैरा एशियन गेम्स, 111 पदकों के रिकॉर्ड के बाद भारतीय महिला खिलाड़ियों से उम्मीदें

    Tue Oct 13 , 2026
    नई दिल्ली ।पैरा एशियन गेम्स (Para Asian Games) में भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन को बेहतर बनाने में महिला एथलीटों (Women Athletes) की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण रही है। हांगझोऊ (Hangzhou) में 2022 में आयोजित पिछले पैरा एशियाई खेलों में भारतीय महिला खिलाड़ियों ने कुल 40 पदक (Medals) अपने नाम किए थे। भारत ने उस प्रतियोगिता में […]
    सम्बंधित ख़बरें
    लेटेस्ट
    खरी-खरी
    का राशिफल
    जीवनशैली
    मनोरंजन
    अभी-अभी
  • Archives

  • ©2026 Agnibaan , All Rights Reserved