
नई दिल्ली ।कॉमेडियन (Comedian) सुदेश लहरी (Sudesh Lehri) आज मनोरंजन जगत (Entertainment Industry) में अपनी अलग पहचान रखते हैं। उनकी जिंदगी में एक समय ऐसा भी था, जब परिवार की जरूरतें पूरी करना बेहद मुश्किल था। आर्थिक तंगी (Financial Hardship) के कारण उन्हें बचपन से ही कई तरह के काम करने पड़े। कभी चाय की दुकान (Tea Shop) पर काम किया, तो कभी फैक्ट्रियों में चाय पहुंचाई। उन्होंने कुल्फी बेचने के साथ हलवा, बर्फी और समोसे बनाने का काम भी किया। आज उनकी जिंदगी में जो बदलाव दिखाई देता है, उसके पीछे लंबे संघर्ष की कहानी है।
सुदेश लहरी ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए बताया था कि परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि कई बार घर में चाय बनाने तक के लिए पर्याप्त साधन नहीं होते थे। कम उम्र में ही उन्हें काम की तलाश करनी पड़ी। उनके पास पहनने के लिए चप्पलें तक नहीं थीं। चाय की दुकान पर काम करते समय वह आसपास की फैक्ट्रियों में चाय पहुंचाते थे। कभी-कभी रास्ते में किसी दुकान से एक कप में थोड़ी चाय लेकर पी लेते और फिर कप साफ करके वापस कर देते थे।
उन्होंने जूते बनाने और कार से जुड़ी फैक्ट्रियों में भी काम किया। अलग-अलग काम करते हुए उन्होंने लोगों के बोलने और व्यवहार करने के तरीकों को करीब से देखा। यही अनुभव आगे चलकर उनके अभिनय में भी उपयोगी साबित हुए। सुदेश ने बताया था कि आर्थिक परेशानियों के कारण वह अभिनय की औपचारिक कक्षाएं नहीं ले सके। हालांकि, रोजमर्रा के कामों में लोगों की नकल करना और उनके अंदाज को समझना उनके लिए अभिनय सीखने जैसा अनुभव रहा।
उनके संघर्ष का एक और पहलू परिवार की जिम्मेदारियों से जुड़ा है। आर्थिक तंगी के दौरान एक समय ऐसा आया, जब परिवार को खाना खिलाने के लिए उन्हें अपनी ट्रॉफी बेचनी पड़ी। इसके बदले उन्हें महज 300 से 400 रुपये मिले थे। एक अन्य प्रसंग में उन्होंने बताया था कि अंग्रेजी अच्छी तरह नहीं आने के कारण एक शो की फीस तय करते समय उनसे गलती हो गई। वह 50 हजार रुपये की जगह 15 हजार रुपये मांग बैठे। पैसे मिलने के बाद उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ।
सुदेश लहरी की जिंदगी से जुड़ा एक किस्सा कृष्णा अभिषेक ने भी साझा किया था। उनके मुताबिक, सुदेश एक बार किसी व्यक्ति के अंतिम संस्कार में शामिल होने गए थे। वहां श्मशान घाट के एक कोने में उन्हें एक घायल महिला बैठी दिखाई दी। महिला के शरीर पर कई घाव थे और वह तकलीफ में थी। सुदेश उसे अपने घर ले आए और मां की तरह उसकी देखभाल करने लगे। उन्होंने उस महिला को अपने साथ रखा और उसकी सेवा की।
कृष्णा अभिषेक के अनुसार, महिला ने जीवन के अंतिम समय में सुदेश को आशीर्वाद दिया था कि उनका कभी बुरा नहीं होगा और वह जीवन में बहुत सफल होंगे। उन्होंने यह भी बताया कि इस घटना के बाद सुदेश को मुंबई से काम के लिए फोन आया। इसके बाद उनके करियर में बदलाव आने लगा और वह मनोरंजन जगत में अपनी पहचान बनाने में सफल हुए।
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