img-fluid

सुदेश लहरी ने श्मशान घाट पर घायल महिला को बनाया मां, कभी परिवार के लिए बेची ट्रॉफी, आज कॉमेडी की दुनिया में बड़ा नाम

October 14, 2026

नई दिल्ली ।कॉमेडियन (Comedian) सुदेश लहरी (Sudesh Lehri) आज मनोरंजन जगत (Entertainment Industry) में अपनी अलग पहचान रखते हैं। उनकी जिंदगी में एक समय ऐसा भी था, जब परिवार की जरूरतें पूरी करना बेहद मुश्किल था। आर्थिक तंगी (Financial Hardship) के कारण उन्हें बचपन से ही कई तरह के काम करने पड़े। कभी चाय की दुकान (Tea Shop) पर काम किया, तो कभी फैक्ट्रियों में चाय पहुंचाई। उन्होंने कुल्फी बेचने के साथ हलवा, बर्फी और समोसे बनाने का काम भी किया। आज उनकी जिंदगी में जो बदलाव दिखाई देता है, उसके पीछे लंबे संघर्ष की कहानी है।

सुदेश लहरी ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए बताया था कि परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि कई बार घर में चाय बनाने तक के लिए पर्याप्त साधन नहीं होते थे। कम उम्र में ही उन्हें काम की तलाश करनी पड़ी। उनके पास पहनने के लिए चप्पलें तक नहीं थीं। चाय की दुकान पर काम करते समय वह आसपास की फैक्ट्रियों में चाय पहुंचाते थे। कभी-कभी रास्ते में किसी दुकान से एक कप में थोड़ी चाय लेकर पी लेते और फिर कप साफ करके वापस कर देते थे।
उन्होंने जूते बनाने और कार से जुड़ी फैक्ट्रियों में भी काम किया। अलग-अलग काम करते हुए उन्होंने लोगों के बोलने और व्यवहार करने के तरीकों को करीब से देखा। यही अनुभव आगे चलकर उनके अभिनय में भी उपयोगी साबित हुए। सुदेश ने बताया था कि आर्थिक परेशानियों के कारण वह अभिनय की औपचारिक कक्षाएं नहीं ले सके। हालांकि, रोजमर्रा के कामों में लोगों की नकल करना और उनके अंदाज को समझना उनके लिए अभिनय सीखने जैसा अनुभव रहा।
उनके संघर्ष का एक और पहलू परिवार की जिम्मेदारियों से जुड़ा है। आर्थिक तंगी के दौरान एक समय ऐसा आया, जब परिवार को खाना खिलाने के लिए उन्हें अपनी ट्रॉफी बेचनी पड़ी। इसके बदले उन्हें महज 300 से 400 रुपये मिले थे। एक अन्य प्रसंग में उन्होंने बताया था कि अंग्रेजी अच्छी तरह नहीं आने के कारण एक शो की फीस तय करते समय उनसे गलती हो गई। वह 50 हजार रुपये की जगह 15 हजार रुपये मांग बैठे। पैसे मिलने के बाद उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ।
सुदेश लहरी की जिंदगी से जुड़ा एक किस्सा कृष्णा अभिषेक ने भी साझा किया था। उनके मुताबिक, सुदेश एक बार किसी व्यक्ति के अंतिम संस्कार में शामिल होने गए थे। वहां श्मशान घाट के एक कोने में उन्हें एक घायल महिला बैठी दिखाई दी। महिला के शरीर पर कई घाव थे और वह तकलीफ में थी। सुदेश उसे अपने घर ले आए और मां की तरह उसकी देखभाल करने लगे। उन्होंने उस महिला को अपने साथ रखा और उसकी सेवा की।

कृष्णा अभिषेक के अनुसार, महिला ने जीवन के अंतिम समय में सुदेश को आशीर्वाद दिया था कि उनका कभी बुरा नहीं होगा और वह जीवन में बहुत सफल होंगे। उन्होंने यह भी बताया कि इस घटना के बाद सुदेश को मुंबई से काम के लिए फोन आया। इसके बाद उनके करियर में बदलाव आने लगा और वह मनोरंजन जगत में अपनी पहचान बनाने में सफल हुए।



  • आज सुदेश लहरी का नाम कॉमेडी की दुनिया में जाना जाता है। उनके जीवन का यह सफर आर्थिक कठिनाइयों, परिवार के लिए किए गए संघर्ष और काम के प्रति उनके अनुभवों को सामने लाता है। चाय बेचने और फैक्ट्रियों में काम करने से लेकर मनोरंजन जगत में पहचान बनाने तक की उनकी यात्रा उनके जीवन के अलग-अलग दौर को दर्शाती है।

    Share:

  • एक साल जेल में रहने के बाद अमृतप्रभा महंत को मिली राहत, जुबीन गर्ग मौत मामले में जमानत पर रिहा होने वाली पहली आरोपी

    Wed Oct 14 , 2026
    नई दिल्ली । असमAssam) के मशहूर गायक जुबीन गर्ग(famous singer Zubeen Garg) की मौत के मामले में एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। इस मामले में आरोपी सिंगर अमृतप्रभा महंत (Accused singer Amritprabha Mahanta)को जेल से रिहा कर दिया गया है। मंगलवार को आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद वह हाफलोंग सब-जेल से बाहर […]
    सम्बंधित ख़बरें
    लेटेस्ट
    खरी-खरी
    का राशिफल
    जीवनशैली
    मनोरंजन
    अभी-अभी
  • Archives

  • ©2026 Agnibaan , All Rights Reserved