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जबलपुर-भोपाल-इंदौर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए बनेगी कंपनी

October 16, 2026

  • मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद की बैठक में लिया गया निर्णय

जबलपुर। जबलपुर और महाकौशल क्षेत्र में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए राज्य सरकार ने जबलपुर-भोपाल-इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर के विकास हेतु विशेष कंपनी के गठन को मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद की बैठक में लिए गए इस निर्णय के तहत जबलपुर-भोपाल-इंदौर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड का गठन किया जाएगा। कंपनी के माध्यम से कॉरिडोर के आसपास सुनियोजित औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने, निवेश आकर्षित करने और उद्योगों के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर काम किया जाएगा। कंपनी पूरी तरह राज्य शासन के स्वामित्व में रहेगी। इसके लिए प्रारंभिक रूप से 100 करोड़ रुपये की पूंजी और 20 करोड़ रुपये की ब्याज-मुक्त कार्यशील पूंजी का प्रावधान किया गया है। कॉरिडोर के साथ जबलपुर में निर्माणाधीन रिंग रोड की कनेक्टिविटी को औद्योगिक विकास से जोडऩे की योजना है। इससे उद्योग, व्यापार, माल परिवहन और कृषि आधारित कारोबार के विस्तार की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।


  • रक्षा उद्योगों पर जोर
    मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि 28 सितंबर को जबलपुर के उद्योगपतियों के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर क्षेत्र के औद्योगिक विकास से जुड़े विषय रखे थे। उनके मुताबिक, विशेष कंपनी के गठन की मंजूरी जबलपुर के औद्योगिक विकास के लिए किए गए प्रयासों का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि बेहतर सड़क संपर्क से जबलपुर की रक्षा क्षेत्र से जुड़ी औद्योगिक इकाइयों और उनके सहायक उद्योगों को लाभ मिल सकता है। भोपाल और इंदौर के माध्यम से गुजरात के बंदरगाहों तक संपर्क बेहतर होने से कच्चे माल और अन्य सामग्री की आवाजाही सुगम होने की संभावना है।

    लॉजिस्टिक्स हब बनेगा
    जबलपुर की भौगोलिक स्थिति और निर्माणाधीन रिंग रोड को देखते हुए कॉरिडोर की कनेक्टिविटी माल परिवहन और वितरण के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। योजना के तहत ट्रक टर्मिनल, वेयरहाउस, माल वितरण केंद्र और अन्य लॉजिस्टिक्स सुविधाओं के विकास की संभावनाएं हैं। इससे परिवहन, पैकेजिंग, वाहन मरम्मत, भंडारण और अन्य सहायक कारोबार को भी अवसर मिल सकते हैं। औद्योगिक क्षेत्रों के विकास से बड़े उद्योगों के साथ छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए भी संभावनाएं बन सकती हैं। इससे निवेश और कारोबार बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

    क्रियान्वयन की चुनौती
    अगले चरण में भूमि की उपलब्धता का आकलन, संभावित औद्योगिक क्षेत्रों की पहचान, मास्टर प्लान और विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन तैयार करने जैसे काम किए जाएंगे। इसके बाद जरूरी स्वीकृतियों, निवेश और वित्तीय व्यवस्था पर काम होगा। जबलपुर और महाकौशल के लिए इस योजना का महत्व केवल बेहतर सड़क संपर्क तक सीमित नहीं है। यदि औद्योगिक क्लस्टर, परिवहन सुविधाएं और निवेश से जुड़ी व्यवस्थाएं समयबद्ध तरीके से विकसित होती हैं, तो क्षेत्र में स्थानीय उद्योगों के विस्तार और रोजगार सृजन के अवसर बढ़ सकते हैं।

    सात जिलों में पांच आर्थिक क्लस्टर की योजना
    कॉरिडोर के अंतर्गत सात जिलों में पांच संभावित आर्थिक क्लस्टर विकसित करने की योजना है। इनके स्थान और स्वरूप का अंतिम निर्धारण भूमि की उपलब्धता, बिजली-पानी, पर्यावरणीय परिस्थितियों, सड़क संपर्क, बाजार की मांग और निवेशकों की रुचि के तकनीकी अध्ययन के आधार पर किया जाएगा। कंपनी की गवर्निंग काउंसिल के अध्यक्ष मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव होंगे। इसमें विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहेंगे। कंपनी में मास्टर प्लानिंग, भूमि प्रबंधन, इंजीनियरिंग, वित्त, विधि, सार्वजनिक-निजी भागीदारी और निवेश से संबंधित विशेषज्ञ इकाइयां गठित की जाएंगी।

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