नई दिल्ली। शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट (Shiv Sena Uddhav belongs to Balasaheb Thackeray)के सांसद संजय राउत (Member of Parliament Sanjay Raut)ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत (Chief Justice Surya Kant)को लेकर की गई अपनी टिप्पणियों पर माफी मांगने की पेशकश की है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से जवाब मांगे जाने के बाद राउत ने कहा कि यदि गुस्से में उनके मुंह से कोई अनुचित शब्द निकल गया है तो वह दस बार माफी मांगने के लिए भी तैयार हैं। हालांकि उन्होंने इसके साथ ही कहा कि देश में लोकतंत्र की रक्षा करना भी न्यायपालिका की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक और न्यायिक हलकों में विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
मीडिया से बातचीत के दौरान संजय राउत ने कहा कि वह शिवसेना के चुनाव चिह्न को लेकर पिछले चार साल से न्याय की मांग कर रहे हैं। उनके मुताबिक इस मामले में लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा करने के कारण उनके भीतर नाराजगी है। इसी गुस्से में यदि उनसे कोई अनुचित टिप्पणी हो गई है तो वह उसके लिए माफी मांगने को तैयार हैं। राउत ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य अदालत की अवमानना करना नहीं था और न्यायपालिका के प्रति उनका सम्मान बना हुआ है।
यह पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट की उस टिप्पणी के बाद बढ़ा जिसमें मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के खिलाफ संजय राउत की टिप्पणियों पर उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में राउत और पत्रकार निखिल वागले को नोटिस जारी किया था। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से दोनों के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग की गई थी। अब इस मामले में संबंधित पक्षों के जवाब और अदालत की आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।
राउत ने अपने बयान में सुप्रीम कोर्ट को न्याय की उम्मीद रखने वाले लोगों के लिए आखिरी सहारा बताया। उन्होंने कहा कि वह न्याय पाने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाते रहेंगे। उनका कहना है कि उनकी टिप्पणियों को चुनाव में कथित अनियमितताओं राजनीतिक दलों में दलबदल और संवैधानिक संस्थाओं के कामकाज को लेकर जनता में मौजूद असंतोष के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
विवाद की पृष्ठभूमि में विपक्षी नेताओं और मुख्य न्यायाधीश के बीच मुलाकात से जुड़ा घटनाक्रम भी है। खबरों के मुताबिक राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के नेतृत्व में विपक्षी नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR में कथित अनियमितताओं को लेकर ज्ञापन सौंपना चाहता था। बताया गया कि मुख्य न्यायाधीश ने प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात नहीं की। इसके बाद संजय राउत ने सोशल मीडिया पर मुख्य न्यायाधीश की आलोचना की और न्यायाधीशों तथा राजनीतिक नेताओं के बीच कथित बातचीत को लेकर भी टिप्पणियां कीं।
इन बयानों के बाद सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने राउत और निखिल वागले के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के लिए सहमति मांगी। गुरुवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने राउत की याचिका पर प्रारंभिक रूप से विचार करने की सहमति जताई थी। हालांकि उनसे अपने आचरण को लेकर स्पष्टीकरण देने की बात भी कही गई।
संजय राउत ने दोहराया कि उन्हें न्यायपालिका से गलत कामों के खिलाफ कार्रवाई की उम्मीद है। उन्होंने माफी मांगने की तत्परता जताने के साथ लोकतंत्र की रक्षा का मुद्दा भी उठाया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि उनके स्पष्टीकरण पर सुप्रीम कोर्ट क्या रुख अपनाता है और आपराधिक अवमानना की कार्यवाही को लेकर आगे क्या निर्णय होता है।