
नई दिल्ली। दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरव दास (Sourav Das) और आशुतोष रांका (Ashutosh Ranka) की जमानत से जुड़ी कार्यवाही के दौरान एक मजिस्ट्रेट (Magistrate) को कथित धमकी (Threat) दिए जाने का मामला सामने आया है। अधिकारियों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने रविवार को अज्ञात लोगों के खिलाफ नॉन-कॉग्निजेबल रिपोर्ट (NCR) दर्ज की। फिलहाल, धमकी देने वाले व्यक्ति या लोगों की पहचान सामने नहीं आई है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब CJP ने आरोप लगाया था कि दोनों नेताओं की रिहाई में देरी की जा रही है और जमानत के लिए पेश किए गए चार जमानतदारों को अस्पष्ट कारणों से खारिज कर दिया गया।
सुनवाई में देरी का CJP ने उठाया मुद्दा
CJP की कानूनी प्रमुख रत्ना सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर सुनवाई की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि दोपहर 12 बजे होने वाली सुनवाई के लिए वह सुबह 11 बजे से पुलिस स्टेशन में मौजूद थीं, लेकिन शाम 4:42 बजे तक असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस, जो स्पेशल एग्जिक्युटिव मजिस्ट्रेट (SEM) के रूप में भी कार्य करते हैं, वहां नहीं पहुंचे थे।
रत्ना सिंह ने SEM कोर्ट की कार्यवाही को ‘अधिकारों का पूरी तरह गलत इस्तेमाल’ बताया। हालांकि, इस संबंध में पुलिस की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
मजिस्ट्रेट ने कहा- किसी ने धमकी दी
रत्ना सिंह के मुताबिक, बाद में मजिस्ट्रेट ने बताया कि किसी व्यक्ति ने उन्हें धमकी दी है। उन्होंने कहा कि वकीलों ने मजिस्ट्रेट से धमकी देने वाले के खिलाफ कार्रवाई करने और संबंधित व्यक्ति का नाम तथा फोन नंबर आदेश में दर्ज करने की मांग की थी।
पुलिस ने इस मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ NCR दर्ज की है। नॉन-कॉग्निजेबल रिपोर्ट आम तौर पर ऐसे मामलों में दर्ज की जाती है, जिनमें पुलिस संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत बिना वारंट गिरफ्तारी नहीं कर सकती और मजिस्ट्रेट की अनुमति के बिना जांच नहीं कर सकती।
14 अक्टूबर को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे गए थे दोनों नेता
सौरव दास और आशुतोष रांका को 14 अक्टूबर को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। दोनों पर जंतर-मंतर के बंद गेट को पार कर परिसर में पहुंचने का मामला है। जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित नहीं किए जाने की बात भी सामने आई थी।
दोनों नेताओं की जमानत और रिहाई को लेकर CJP लगातार सवाल उठा रही है। पार्टी का आरोप है कि जमानत के लिए पेश किए गए चार जमानतदारों को अस्पष्ट कारणों से खारिज किया गया, जिससे रिहाई की प्रक्रिया में देरी हुई।
कपिल सिब्बल से सलाह लेने का दावा
CJP ने इससे पहले शनिवार को कहा था कि उसने वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल से कानूनी सलाह ली है। पार्टी ने चेतावनी दी थी कि यदि रविवार तक दोनों नेताओं को रिहा नहीं किया गया, तो वह कानूनी कार्रवाई करेगी।
CJP मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ प्रदर्शन कर रही है। फिलहाल, मजिस्ट्रेट को कथित धमकी दिए जाने के मामले में पुलिस की कार्रवाई और दोनों नेताओं की जमानत से जुड़ी आगे की प्रक्रिया पर नजर बनी हुई है।
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