
नई दिल्ली । जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) के उत्तरी कश्मीर स्थित कुपवाड़ा (Kupwara) जिले के केरन सेक्टर में नियंत्रण रेखा (Line of Control) के पास घुसपैठ की कोशिश को सुरक्षाबलों ने नाकाम कर दिया। जुमगुंड इलाके में 17 अक्टूबर को संदिग्ध आतंकियों की गतिविधि सामने (Activity) आने के बाद कार्रवाई की गई, जिसमें दो पाकिस्तानी आतंकवादी (Pakistani Terrorists) मारे गए। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, चार संदिग्ध घुसपैठ की कोशिश कर रहे थे। इनमें से दो को सुरक्षाबलों (Security Forces) ने मार गिराया, जबकि बाकी दो की तलाश के लिए इलाके में अभियान चलाया जा रहा है।
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, यह घटना ऐसे समय हुई है, जब ऊंचाई वाले पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी शुरू हो चुकी है। जुमगुंड क्षेत्र में दो दिन पहले हुई बर्फबारी के कारण जमीन और आसपास के पहाड़ बर्फ से ढके हुए थे। आशंका जताई गई कि घुसपैठ की कोशिश करने वाले आतंकियों ने इसी स्थिति का फायदा उठाने की योजना बनाई थी। हालांकि, सीमा पर तैनात जवानों की सतर्कता के चलते उनकी कोशिश सफल नहीं हो सकी।
सेना के मुताबिक, जुमगुंड इलाके में तड़के करीब तीन बजे तीन से चार संदिग्धों की हलचल देखी गई थी। इसके बाद सुरक्षाबलों ने कार्रवाई की। मुठभेड़ में दो संदिग्ध आतंकियों को मार गिराया गया। शेष संदिग्धों का पता लगाने के लिए व्यापक तलाशी अभियान शुरू किया गया। इलाके की भौगोलिक परिस्थितियों और बर्फ से ढके रास्तों को देखते हुए तलाशी के दौरान अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।
इस घटना में आतंकियों की पोशाक भी ध्यान देने वाली रही। मारे गए आतंकियों ने सफेद रंग की ऐसी वर्दी पहन रखी थी, जिसका इस्तेमाल बर्फीले इलाकों में छिपने के लिए किया जाता है। इसे स्नो कैमोफ्लाज कहा जाता है। बर्फ से ढकी जमीन और पहाड़ों के बीच सफेद कपड़े पहनने से किसी व्यक्ति की पहचान करना मुश्किल हो सकता है। ऐसी पोशाक का उपयोग ऊंचाई वाले ठंडे क्षेत्रों में तैनात सैनिक भी करते हैं, क्योंकि यह आसपास के वातावरण के साथ घुलने-मिलने में मदद करती है और ठंड से बचाव में भी उपयोगी होती है।
घुसपैठ की इस कोशिश के पीछे पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में सक्रिय आतंकी ढांचे को लेकर भी चिंता जताई गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पहले की सैन्य कार्रवाइयों में निशाना बनाए गए कुछ आतंकी ठिकानों को दोबारा सक्रिय किए जाने और वहां आतंकियों को प्रशिक्षण दिए जाने की आशंका है। दावा किया गया है कि ऐसे शिविरों में 100 से अधिक आतंकियों को भारत में घुसपैठ और हिंसक गतिविधियों के लिए तैयार किया जा रहा है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
बर्फबारी के मौसम में नियंत्रण रेखा के ऊंचाई वाले इलाकों से घुसपैठ की आशंका को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है। पुंछ, राजौरी, कुपवाड़ा, उरी, गुरेज, केरन, माछेल और तंगधार जैसे क्षेत्रों में गश्त बढ़ाए जाने की जानकारी दी गई है। नियंत्रण रेखा के आसपास के इलाकों के साथ-साथ भीतरी क्षेत्रों, कस्बों और शहरों में भी निगरानी तथा जांच तेज की गई है।
सुरक्षाबलों का तलाशी अभियान जारी है और दो अन्य संदिग्धों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। इस कार्रवाई के बाद सीमावर्ती क्षेत्र में सतर्कता बढ़ा दी गई है। आने वाले दिनों में बर्फबारी के बीच घुसपैठ की संभावित कोशिशों को रोकना सुरक्षा एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बनी रहेगी।
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