
नई दिल्ली । यमन (Yemen) में हूती विद्रोहियों (Houthi Rebels) और सरकार समर्थक सुरक्षा बलों के बीच संघर्ष एक बार फिर गंभीर हो गया है। सोमवार को दक्षिणी यमन के शबवा प्रांत (Shabwah Province) स्थित अल-अलम सैन्य शिविर (Al-Alam Military Camp) पर बैलिस्टिक मिसाइलों (Ballistic Missiles) से हमला किया गया। इस हमले में कम से कम 53 सैनिकों की मौत हो गई, जबकि 200 से अधिक जवान घायल (Injured) हुए हैं। मृतकों में बड़ी संख्या उन सैनिकों की बताई जा रही है, जिन्हें हाल ही में भर्ती किया गया था। इस घटना ने देश में लंबे समय से जारी गृहयुद्ध (Civil War) के दोबारा तेज होने की आशंका बढ़ा दी है।।
यमन की सेना के प्रवक्ता कर्नल माजेद अल-नजिली के अनुसार, हूती विद्रोहियों ने पुलिस और सुरक्षा बलों के प्रशिक्षण केंद्र को निशाना बनाते हुए तीन बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। हालांकि, उन्होंने हताहतों की संख्या के बारे में कोई जानकारी नहीं दी। अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त यमन सरकार के दो सैन्य अधिकारियों ने 53 सैनिकों की मौत और 200 से अधिक जवानों के घायल होने की पुष्टि की। हूती विद्रोहियों के नियंत्रण वाली समाचार एजेंसी ने भी हमले में कई लोगों के मारे जाने और घायल होने की जानकारी दी, लेकिन मृतकों तथा घायलों की सटीक संख्या नहीं बताई।
अल-अलम सैन्य शिविर शबवा प्रांत की राजधानी अटक के उत्तर में जर्दान जिले में स्थित है। यह इलाका रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यहां से सरकार के नियंत्रण वाले मारीब प्रांत तक पहुंचने वाले रास्तों पर निगरानी रखी जा सकती है। इस क्षेत्र से सरकारी बलों को सैन्य सामग्री और जरूरी आपूर्ति पहुंचाने में भी सहायता मिलती है। पहले इस शिविर का इस्तेमाल संयुक्त अरब अमीरात के समर्थन वाले एक सशस्त्र समूह ने किया था।
एक सैन्य अधिकारी के मुताबिक, हमले में निशाना बनाए गए सैनिक रैपिड इंटरवेंशन नामक नई सुरक्षा इकाई का हिस्सा थे। इस इकाई को संबंधित क्षेत्र की सुरक्षा और रक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। प्रशिक्षण केंद्र पर हमला होने से सुरक्षा बलों को भारी नुकसान पहुंचा है।
यमन में संघर्ष बढ़ने के पीछे कई क्षेत्रीय और राजनीतिक कारण बताए जा रहे हैं। हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब समर्थित सरकारी बलों के बीच पिछले कई महीनों से तनाव बढ़ रहा है। इसके साथ ही ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने भी क्षेत्रीय परिस्थितियों को प्रभावित किया है। वर्ष 2022 में लागू हुआ संघर्षविराम यमन के गृहयुद्ध में लड़ाई कम करने में महत्वपूर्ण साबित हुआ था, लेकिन हाल के घटनाक्रमों ने उसकी स्थिति को कमजोर कर दिया है।
इस बीच, रविवार को उत्तरी यमन के हूती नियंत्रित सादा प्रांत में भी हवाई हमला हुआ। हूती प्रशासन के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इस हमले में कम से कम नौ लोगों की मौत हुई, जिनमें पांच बच्चे और दो महिलाएं शामिल थीं। हूतियों ने हमले के लिए सऊदी अरब के नेतृत्व वाले बलों को जिम्मेदार ठहराया। सप्ताहांत के दौरान हुए कई हमलों में 30 से अधिक लोगों के मारे जाने या घायल होने का दावा भी किया गया। हालांकि, सऊदी अरब की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।
यमन के संघर्ष का असर सऊदी अरब और लाल सागर के आसपास के क्षेत्रों में भी दिखाई दे रहा है। हूती विद्रोहियों ने हाल के हफ्तों में सऊदी अरब पर हमले फिर शुरू किए हैं। उनका आरोप है कि सऊदी अरब यमन की सरकार को समर्थन दे रहा है। विद्रोहियों ने सऊदी हवाई अड्डों, तेल प्रतिष्ठानों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। इन हमलों से हजारों उड़ानें प्रभावित होने और 19 लोगों की मौत होने की जानकारी दी गई है। सऊदी तेल कंपनी अरामको के मुख्यालय पर हमले की भी सूचना सामने आई है।
लाल सागर के तट और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास हूतियों की गतिविधियां भी क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए अहम मानी जा रही हैं। यह समुद्री मार्ग अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए महत्वपूर्ण है। इस रणनीतिक क्षेत्र पर नियंत्रण को लेकर तनाव बढ़ने के बीच सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने इसी महीने सैन्य अभियान शुरू किया है। ताजा मिसाइल हमले ने यमन में शांति बहाली की चुनौतियों को और गंभीर बना दिया है।
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