
नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने देशवासियों को विजयादशमी की शुभकामनाएं दीं (Extended his best wishes to the Nation on the occasion of Vijayadashami) । इसके साथ ही पीएम ने सुभाषित में भगवान श्रीराम की स्तुति भी की ।
पीएम की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा गया, “आप सभी को विजयादशमी की अनंत शुभकामनाएं। उल्लास और विश्वास का यह विजय पर्व हर किसी के संकल्प को नई शक्ति प्रदान करे। सभी का जीवन सुख-सौभाग्य और सफलता से समृद्ध हो, यही कामना है।” प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक और पोस्ट में संस्कृत सुभाषित साझा किया है। पीएम की ओर से संस्कृत श्लोक, “रामो विग्रहवान् धर्मस्साधुस्सत्यपराक्रमः। राजा सर्वस्य लोकस्य देवानां मघवानिव॥” शेयर किया गया है, जिसका हिंदी भावार्थ है कि भगवान् श्रीराम साक्षात् धर्म के जीवंत स्वरूप हैं। वे सज्जनों के परम आश्रय, सत्यसंकल्प एवं सत्यपराक्रमी हैं। वे इस संपूर्ण विश्व के ऐसे एकमात्र शासक हैं, जो समस्त लोकों का ठीक उसी प्रकार पालन और रक्षण करते हैं, जैसे देवराज इंद्र संपूर्ण देवलोक के अधिपति और रक्षक हैं।
प्रधानमंत्री ने महर्षि वाल्मीकि की ओर से रचित ‘वाल्मीकि रामायण’ के अरण्यकांड के 37वें सर्ग का 13वां श्लोक शेयर किया है। इस श्लोक के माध्यम से भगवान श्रीराम के दिव्य चरित्र, गुणों और उनके प्रभाव का अत्यंत सुंदर वर्णन किया गया है। जब राक्षस ऋषियों और वनों में रहने वाले साधु-संतों पर अत्याचार कर रहे थे, तब श्रीराम ने उनके दुखों को दूर करने और धर्म की स्थापना करने का संकल्प लिया था। इस प्रसंग में श्रीराम के स्वरूप को धर्म के साक्षात साकार रूप के रूप में चित्रित किया गया है।
इस श्लोक का भावार्थ है कि धर्म केवल कोई अमूर्त नियम या सिद्धांत नहीं है, बल्कि श्रीराम के आचरण, उनके वचनों और उनके जीवन में धर्म शरीर धारण करके प्रकट हुआ है। वे जीवन की हर परिस्थिति (चाहे पुत्र के रूप में, भाई के रूप में, मित्र के रूप में या राजा के रूप में) में धर्म का ही पालन करते हैं। इस श्लोक के माध्यम से कहा गया है कि जिस प्रकार देवराज इंद्र संपूर्ण देवलोक का नेतृत्व और रक्षा करते हैं, उसी प्रकार प्रभु श्रीराम इस समस्त चराचर जगत के स्वामी और रक्षक (राजाधिराज) हैं। उनका आधिपत्य किसी भय या बल से नहीं, बल्कि उनके धर्मयुक्त शासन से है।
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