
डेस्क। अमेरिकी कांग्रेस सदस्य राजा कृष्णमूर्ति ने को सोशल मीडिया पर भारत-विरोधी, दक्षिण एशिया-विरोधी और हिंदू-विरोधी नफरत बढ़ने पर चिंता जताई। उन्होंने बड़ी टेक कंपनियों पर ऑनलाइन नफरत से मुनाफा कमाने का आरोप लगाया और कांग्रेस से मांग की कि इन कंपनियों को जवाबदेह ठहराया जाए। अपने एक्स हैंडल पर एक पोस्ट में कृष्णमूर्ति ने कहा, ‘सोशल मीडिया पर भारत-विरोधी नफरत तेजी से बढ़ रही है और बड़ी टेक कंपनियां इससे मुनाफा कमा रही हैं। इन कंपनियों के पास उस नफरत को रोकने का कोई कारण या प्रोत्साहन नहीं है, जिसे फैलाने में वे खुद मदद कर रही हैं। कांग्रेस को इन्हें जवाबदेह ठहराना चाहिए।’
उन्होंने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म नफरत फैलाने वाले कंटेंट को रोकने में नाकाम रहे हैं। उनके मुताबिक दक्षिण एशिया-विरोधी नफरत को बढ़ावा देने वाली पोस्ट में 240 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। एक अन्य पोस्ट में उन्होंने कहा, ‘बड़ी टेक कंपनियां अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की निगरानी नहीं कर रही हैं, जहां दक्षिण एशिया-विरोधी, भारत-विरोधी और हिंदू-विरोधी नफरत की बाढ़ आ गई है। मैं आपको बस एक आंकड़ा देता हूं, एक्स पर ऐसी पोस्ट या ट्वीट, जो दक्षिण एशिया-विरोधी नफरत को बढ़ावा देते हैं, उनमें बहुत कम समय में 240 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई है।’
उन्होंने आगे कहा कि दुर्भाग्य से, बड़ी टेक कंपनियां इस नफरत से मुनाफा कमा रही हैं। अभी उनके पास इसे कम करने का कोई प्रोत्साहन नहीं है। इसलिए, हमें संघीय स्तर पर यह सुनिश्चित करना होगा कि अगर वे कोई कार्रवाई नहीं करती हैं, तो उन्हें इसके पूरे परिणाम भुगतने पड़ें।’ उनकी यह टिप्पणी दक्षिण एशियाई समुदायों के खिलाफ ऑनलाइन नफरत को लेकर जताई जा रही चिंताओं के बीच आई है। यह घटना 11 अक्तूबर को इलिनोइस के ऑरोरा में स्थित श्री वेंकटेश्वर स्वामी (बालाजी) हिंदू मंदिर में हुई गोलीबारी की कोशिश के बाद सामने आई है। जिस समय यह हमला हुआ, उस वक्त कृष्णमूर्ति अपने परिवार के साथ मंदिर में पूजा कर रहे थे।
उन्होंने कांग्रेस के 105 सदस्यों (जिसमें कांग्रेस के सभी भारतीय-अमेरिकी सदस्य भी शामिल हैं) के साथ मिलकर एफबीआई निदेशक कश पटेल से इस घटना की जांच एक संभावित ‘संघीय हेट क्राइम’ (नफरत से प्रेरित अपराध) के रूप में करने का आग्रह किया। अभियोजकों के अनुसार, 19 वर्षीय एलेक्जेंड्रोस पैपोराकिस, जो खुद को ‘नियो-नाजी’ (नाजी विचारधारा का समर्थक) मानता है, ने मंदिर के बाहर एक व्यक्ति को गोली मारने की कोशिश की, लेकिन उसकी राइफल जाम हो गई। वह वहां से भाग गया और बाद में उसने वापस आने की योजना के बारे में बताया, लेकिन एक सहकर्मी ने पुलिस को सूचित कर दिया, जिसके बाद पुलिस ने उसे उसी दिन गिरफ्तार कर लिया। अभियोजकों का आरोप है कि पैपोराकिस ने ‘श्वेत वर्चस्व’ (white supremacist) का समर्थन करने वाला आठ पन्नों का एक घोषणापत्र लिखा था, जिसमें एक हिंदू पूजा स्थल पर भारतीय मूल के लोगों के खिलाफ हिंसा करने की बात कही गई थी।
उन्होंने डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी की एक विवादित पोस्ट का भी जिक्र किया, जिसमें एक सिख व्यक्ति को निशाना बनाया गया था, कृष्णमूर्ति ने कहा, ‘इसका सबसे बड़ा उदाहरण डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी का वह ट्वीट है, जो उनके आधिकारिक अकाउंट से किया गया था। इसमें ‘मिस्टर सिंह’ नाम के एक व्यक्ति को निशाना बनाते हुए कहा गया था, ‘खुद देश छोड़कर चले जाओ, वरना…’। और जैसा कि अंदेशा था, ठीक एक हफ्ते बाद ‘मिस्टर सिंह’ नाम के एक सिख ट्रक ड्राइवर को 17 बार चाकू मारा गया, जिससे उनकी जान जाते-जाते बची।’
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