नई दिल्ली। अमेरिका की पूर्व विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन (Hillary Clinton) ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की विदेश नीति पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रंप रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) के प्रति झुकाव दिखा रहे हैं और उनकी नीतियों से ऐसा लगता है कि वह दुनिया को तीन प्रभाव क्षेत्रों में बांटना चाहते हैं। हिलेरी के मुताबिक, इस व्यवस्था में उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका सहित ग्रीनलैंड पर अमेरिका का प्रभुत्व होगा, यूरोप रूस के प्रभाव में आ जाएगा और दुनिया के बाकी हिस्सों पर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का दबदबा होगा।
हिलेरी ने यह टिप्पणी एक वीडियो पॉडकास्ट में पत्रकार कारा स्विशर के साथ बातचीत के दौरान की। उन्होंने ट्रंप की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति पुतिन की मदद करने के लिए तैयार नजर आते हैं। हालांकि, दुनिया को तीन हिस्सों में बांटने की यह व्याख्या हिलेरी क्लिंटन का राजनीतिक आकलन है, न कि अमेरिका, रूस और चीन के बीच किसी औपचारिक समझौते की पुष्टि।
हिलेरी क्लिंटन ने बातचीत के दौरान कहा कि ट्रंप दुनिया को तीन बड़े प्रभाव क्षेत्रों के रूप में देखते हैं। उनके अनुसार, पहले क्षेत्र में उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका और ग्रीनलैंड शामिल होंगे, जिस पर अमेरिका का प्रभाव रहेगा। दूसरे क्षेत्र में रूस और यूरोप होंगे, जबकि शेष दुनिया चीन के प्रभाव में जा सकती है।
हिलेरी क्लिंटन की यह टिप्पणी ट्रंप की उन नीतियों और बयानों के संदर्भ में आई है, जिनमें वह कनाडा को अमेरिका का हिस्सा बनाने की बात कह चुके हैं। ग्रीनलैंड को अमेरिकी नियंत्रण में लेने की उनकी इच्छा भी लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय रही है।
इसके अलावा, ट्रंप ने पश्चिमी गोलार्ध में अमेरिकी प्रभाव को मजबूत करने के लिए मोनरो सिद्धांत के नए संस्करण के रूप में ‘डोनरो डॉक्ट्रिन’ शब्द का इस्तेमाल किया है। मोनरो सिद्धांत ऐतिहासिक रूप से पश्चिमी गोलार्ध में यूरोपीय शक्तियों के हस्तक्षेप का विरोध करने से जुड़ा रहा है।
हिलेरी का मानना है कि ट्रंप की नीतियां अमेरिका के पारंपरिक सहयोगियों के साथ संबंधों को प्रभावित कर रही हैं। उन्होंने रूस और चीन के प्रति अमेरिकी प्रशासन के रुख को भी अपनी आलोचना का आधार बनाया। हालांकि, इन नीतियों को दुनिया के तीन हिस्सों में बांटने की योजना मानना हिलेरी की व्याख्या है।
अमेरिका की पूर्व विदेश मंत्री ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की महत्वाकांक्षाओं को लेकर भी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यह मानना गलत होगा कि पुतिन यूक्रेन में अपने उद्देश्यों तक सीमित रहेंगे। उनके मुताबिक, रूस भविष्य में यूरोप में भी अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर सकता है।
हिलेरी की यह आशंका यूरोपीय सुरक्षा को लेकर पश्चिमी देशों में जारी बहस से जुड़ी है। रूस ने फरवरी 2022 में यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने पर सैन्य हमला शुरू किया था। इससे पहले 2014 में उसने क्रीमिया पर कब्जा कर लिया था। इन घटनाओं के बाद अमेरिका और उसके सहयोगियों ने रूस पर कई आर्थिक प्रतिबंध लगाए।
हिलेरी क्लिंटन और डोनाल्ड ट्रंप के बीच राजनीतिक टकराव नया नहीं है। वर्ष 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में दोनों आमने-सामने थे। उस दौरान भी हिलेरी ने ट्रंप के रूस के प्रति रुख पर सवाल उठाए थे और उन पर पुतिन के प्रति नरमी दिखाने के आरोप लगाए थे।
अब एक बार फिर हिलेरी ने ट्रंप की रूस नीति को लेकर निशाना साधा है। उनके बयान ने अमेरिका की विदेश नीति, रूस के साथ संबंधों और चीन की वैश्विक भूमिका को लेकर बहस को तेज कर दिया है।
क्रीमिया पर रूस के कब्जे के बाद 2014 से ही अमेरिका ने मॉस्को पर प्रतिबंध लगाए थे। फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस के व्यापक हमले के बाद इन प्रतिबंधों का दायरा और बढ़ा दिया गया। इसके बावजूद ऊर्जा और अन्य क्षेत्रों में रूस के साथ व्यापार को लेकर अमेरिका की नीतियों पर समय-समय पर बहस होती रही है।
रूस से डीजल खरीदने को लेकर ट्रंप प्रशासन के फैसले का उल्लेख भी इस राजनीतिक विवाद के संदर्भ में किया जा रहा है। आलोचक इसे रूस के प्रति नरम रुख के रूप में देखते हैं, जबकि ट्रंप की ओर से ऐसे फैसलों को अमेरिकी राष्ट्रीय हित के आधार पर उचित ठहराया जाता रहा है।
हिलेरी क्लिंटन के आरोपों ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि ट्रंप प्रशासन की विदेश नीति अंतरराष्ट्रीय नियमों और पारंपरिक गठबंधनों को प्राथमिकता देती है या बड़ी शक्तियों के बीच प्रभाव क्षेत्रों की प्रतिस्पर्धा को। हालांकि, दुनिया को तीन हिस्सों में बांटने की किसी औपचारिक अमेरिकी-रूसी-चीनी योजना का प्रमाण इन आरोपों से अपने आप स्थापित नहीं होता।
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