
नई दिल्ली ।भारतीय क्रिकेट टीम (Indian Cricket Team) के अनुभवी तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी (Mohammed Shami) ने टेस्ट क्रिकेट (Test Cricket) से संन्यास (Retirement) लेने का फैसला किया है। 36 वर्षीय शमी ने 6 नवंबर 2026 को सोशल मीडिया पर एक भावुक संदेश (Emotional Message) साझा कर अपने इस फैसले की जानकारी दी। हालांकि, टेस्ट क्रिकेट से विदाई (Test Retirement) के बावजूद उनका क्रिकेट करियर समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने साफ किया है कि वह सीमित ओवरों के क्रिकेट में सक्रिय रहेंगे और आगे भी मैदान पर नजर आएंगे।
शमी का अगला लक्ष्य वनडे और टी20 क्रिकेट में अपनी जगह मजबूत करना है। वह भारतीय टीम में दोबारा वापसी के लिए प्रयास जारी रखेंगे। इसके अलावा इंडियन प्रीमियर लीग और घरेलू क्रिकेट में भी उनकी भागीदारी बनी रहेगी। शमी ने अपने संदेश में यह भी संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर वह अपनी फिटनेस और मैच अभ्यास बनाए रखने के लिए घरेलू रेड बॉल क्रिकेट खेल सकते हैं।
उनका आखिरी टेस्ट मुकाबला जून 2023 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ विश्व टेस्ट चैंपियनशिप का फाइनल था। लंदन के ओवल मैदान पर खेले गए इस मुकाबले के बाद चोटों ने उनकी टेस्ट क्रिकेट में वापसी की राह कठिन कर दी। इसके बाद वह लगातार फिटनेस संबंधी चुनौतियों से जूझते रहे। हालांकि, सीमित ओवरों के क्रिकेट में उन्होंने वापसी की कोशिश जारी रखी। चैंपियंस ट्रॉफी 2025 के बाद से उन्होंने भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व नहीं किया है।
मोहम्मद शमी ने 6 नवंबर 2013 को कोलकाता के ऐतिहासिक ईडन गार्डन्स मैदान पर वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया था। करीब एक दशक लंबे टेस्ट करियर में उन्होंने 64 मुकाबले खेले और 27.71 की औसत से 229 विकेट हासिल किए। इस दौरान उन्होंने छह बार एक पारी में पांच या उससे अधिक विकेट लेने का कारनामा किया।
शमी भारतीय तेज गेंदबाजी आक्रमण के महत्वपूर्ण सदस्य रहे। नई गेंद से स्विंग कराने और पुरानी गेंद से रिवर्स स्विंग हासिल करने की उनकी क्षमता ने उन्हें अलग पहचान दिलाई। विदेशी परिस्थितियों में भी उनका प्रदर्शन प्रभावशाली रहा। दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड और वेस्टइंडीज में खेले गए 35 टेस्ट मुकाबलों में उन्होंने कुल 131 विकेट अपने नाम किए। इन देशों में उनका गेंदबाजी औसत 25 से कम रहा।
दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में शमी का प्रदर्शन विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा। वर्ष 2018 में जोहानिसबर्ग में खेले गए टेस्ट की दूसरी पारी में उन्होंने 28 रन देकर पांच विकेट हासिल किए थे। भारतीय टीम की जीत में उनकी गेंदबाजी ने अहम भूमिका निभाई थी। इसके बाद अगले दक्षिण अफ्रीका दौरे पर सेंचुरियन में खेले गए पहले टेस्ट मुकाबले में भी उन्होंने आठ विकेट लेकर अपनी क्षमता साबित की।
संन्यास की घोषणा करते हुए शमी ने टेस्ट क्रिकेट से जुड़ी यादों और अपने अनुभवों को खास बताया। उन्होंने कहा कि पहली बार भारतीय टेस्ट जर्सी पहनते समय उनका सपना देश के लिए अच्छा प्रदर्शन करना था। अपने सफर के दौरान मिले विकेट, संघर्ष, चोटें और वापसी के अनुभवों ने उन्हें बहुत कुछ सिखाया।
शमी ने यह भी जाहिर किया कि सफेद जर्सी को अलविदा कहना उनके लिए आसान फैसला नहीं था। टेस्ट क्रिकेट उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है और इस प्रारूप से जुड़ी यादें हमेशा उनके साथ रहेंगी। उन्होंने भारी मन से इस सफर को विराम देने की बात कही।
टेस्ट क्रिकेट से संन्यास के बाद अब शमी का ध्यान अपने करियर के अगले चरण पर रहेगा। वनडे, टी20, IPL और घरेलू क्रिकेट में सक्रिय रहकर वह अपनी फिटनेस और प्रदर्शन को बेहतर बनाने के साथ भारतीय टीम में वापसी की संभावनाएं भी तलाशेंगे।
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