
नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा (Indian Cinema) के इतिहास में कई ऐसी फिल्में (Films) रही हैं, जिन्हें कहानी या प्रस्तुति के कारण विवादों का सामना करना पड़ा। ऐसी ही फिल्मों में शामिल है रणदीप हुड्डा (Randeep Hooda) अभिनीत पीरियड ड्रामा ‘रंग रसिया (Rang Rasiya)’, जिसकी रिलीज सेंसर (Censor) संबंधी अड़चनों और लगातार उठे विरोध के कारण करीब छह वर्षों तक टलती रही। वर्ष 2008 में तैयार हो चुकी यह फिल्म आखिरकार वर्ष 2014 में सिनेमाघरों तक पहुंच सकी।
निर्देशक केतन मेहता की इस फिल्म की कहानी प्रसिद्ध चित्रकार राजा रवि वर्मा के जीवन और उनकी कला से प्रेरित है। फिल्म में रणदीप हुड्डा ने एक ऐसे चित्रकार का किरदार निभाया है, जो अपनी कला के माध्यम से देवी-देवताओं की छवियों को आम लोगों तक पहुंचाने का प्रयास करता है। उस दौर में उनकी चित्रकला को सामाजिक और सांस्कृतिक बदलाव का माध्यम भी माना गया था।
फिल्म में कलाकार के व्यक्तिगत जीवन, उसकी सोच और उसकी कलात्मक अभिव्यक्ति को विस्तार से दिखाया गया है। इसी क्रम में मुख्य पात्र और उसकी प्रेरणा बनने वाली महिला के बीच संबंधों को भी कहानी का हिस्सा बनाया गया। इन दृश्यों में कई बोल्ड और अंतरंग प्रसंग शामिल थे, जिन पर सबसे अधिक आपत्ति जताई गई। इन्हीं कारणों से फिल्म को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड की प्रक्रिया के दौरान कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
फिल्म के कुछ पोस्टर और दृश्य भी विवाद का कारण बने। कई संगठनों ने आरोप लगाया कि इनमें हिंदू देवी-देवताओं से जुड़े चित्रण को आपत्तिजनक तरीके से प्रस्तुत किया गया है, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं। इस मुद्दे को लेकर विभिन्न स्थानों पर विरोध प्रदर्शन हुए और कानूनी प्रक्रियाएं भी शुरू हुईं। लगातार बढ़ते विवादों के कारण फिल्म की रिलीज बार-बार टलती रही।
लंबे इंतजार के बाद आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने पर ‘रंग रसिया’ को वर्ष 2014 में सिनेमाघरों में रिलीज किया गया। हालांकि रिलीज में हुई देरी के बावजूद फिल्म ने अपने विषय और प्रस्तुति के कारण दर्शकों तथा समीक्षकों का ध्यान आकर्षित किया। विशेष रूप से रणदीप हुड्डा के अभिनय की काफी सराहना की गई, जिन्होंने एक जटिल और संवेदनशील किरदार को प्रभावशाली ढंग से पर्दे पर निभाया।
फिल्म में अभिनेत्री नंदना सेन भी अहम भूमिका में नजर आईं। दोनों कलाकारों के बीच फिल्माए गए कई दृश्य पहले से ही चर्चा का विषय बने हुए थे। फिल्म का उद्देश्य एक कलाकार के जीवन, उसकी रचनात्मक स्वतंत्रता और समाज के साथ उसके टकराव को दिखाना था। इसी कारण इसकी कहानी कला, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक मान्यताओं के बीच संतुलन जैसे विषयों पर भी चर्चा छेड़ती है।
एक साक्षात्कार में रणदीप हुड्डा ने भी स्वीकार किया था कि फिल्म को सेंसरशिप और विवादों के कारण लंबा इंतजार करना पड़ा। उनका मानना था कि विवादों ने फिल्म के प्रति लोगों की जिज्ञासा जरूर बढ़ाई, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि अंततः दर्शकों को इस कहानी को देखने का अवसर मिला। ‘रंग रसिया’ आज भी उन फिल्मों में गिनी जाती है, जिन्होंने अपनी विषयवस्तु, कलात्मक प्रस्तुति और सेंसर संबंधी विवादों के कारण भारतीय सिनेमा के इतिहास में अलग पहचान बनाई।
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