
इंदौर। इंदौर (Indore) सहित सम्भाग में जानलेवा मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट टीबी (Multidrug-resistant TB) के मरीजो पर नई दवा के परीक्षण और असर का परिणाम जानने के लिए इंदौर की आईआरएल लैब (IRL Lab of Indore) को अनुमति मिल गई है । स्वास्थ्य मंत्रालय सहित सम्बन्धित विभाग इसे टीबी मुक्त अभियान के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बता रहे हैं।
मनोरमा राजे टीबी सेंटर परिसर में संचालित कल्चरल मतलब आईआरएल लैब के प्रभारी डाक्टर शैलेन्द्र जैन ने बताया कि इंदौर के 337 सहित सम्भाग के सभी एमडीआर टीबी मरीजों के इलाज के लिए बडी कामयाबी है। अब इस लैब को टीबी दवाओं बेडाक्विलिन प्रेटोमैनिड के लिए लिक्विड कल्चर ड्रग ससेप्टिबिलिटी टेस्टिंग करने का राष्ट्रीय स्तर का प्रमाण पत्र मतलब सर्टिफिकेट प्राप्त हुआ है, यानी सम्बन्धित नई दवाओं के टेस्टिंग की अनुमति मिल गई है।
यह प्रमाण पत्र अथवा अनुमति सुप्रा नेशनल रेफरेंस लैबोरेटरी (एसएनआरएल), एनआईआरटी चेन्नई एवं केंद्रीय क्षय प्रभाग (सीटीडी) ने दिया है। अब यह प्रयोगशाला प्रदेश की 3 व देश की उन शुरुआती 15 प्रयोगशालाओं में शामिल हो गई हैं, जहां यह अत्यंत जटिल और महत्वपूर्ण जांच संभव हो सकेगी । इससे समय पर मरीजों के लिए सही दवा की व्यवस्था तय की जा सकेगी।
हर साल कई एमडीआर टीबी मरीजों की हो जाती है इलाज के दौरान मौत
इंदौर के 337 मल्टी ड्रग रेजिटेन्ट टीबी के मरीजों के लिए वरदान
इंदौर जिला क्षय अधिकारी डाक्टर जैन के अनुसार पिछले साल 2025 में 337 जानलेवा मल्टी ड्रग रेजिटेन्ट मरीजों के लिए यह अनुमति किसी सौगात या वरदान से कम नहीं है। पिछले 5 सालों में 2021 में 179 साल 2022 में 195 साल 2023 में 236 साल 2024 में 216 जानलेवा टीबी के मरीज मिले हैं। इलाज के दौरान इनमें से कई मरीजों की मृत्यु भी हो चुकी है। ऐसे मरीजों का इलाज अब और आसान होगा ।
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