
इंदौर। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के अलीराजपुर जिले (Alirajpur district) में सरकारी धन के गबन के बड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपना शिकंजा और कस दिया है। इंदौर स्थित प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के उप-क्षेत्रीय कार्यालय ने ब्लॉक शिक्षा कार्यालय (BEO), कट्ठीवाड़ा में हुए 20.47 करोड़ रुपये के घोटाले में मुख्य आरोपी कमल राठौर और पांच अन्य के खिलाफ माननीय विशेष न्यायाधीश (PMLA), इंदौर के समक्ष अभियोजन शिकायत (चार्जशीट) पेश की है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 06 जनवरी 2026 को सभी आरोपियों को नोटिस जारी कर दिए हैं।
कैसे हुआ करोड़ों का गबन?
ईडी की जांच में खुलासा हुआ है कि अप्रैल 2018 से जुलाई 2023 के बीच, यानी करीब 5 सालों तक, कमल राठौर ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर एक सुनियोजित साजिश रची।

फर्जी बिलों का खेल: आरोपियों ने विभिन्न शैक्षिक कार्यक्रमों और कल्याणकारी योजनाओं के लिए आवंटित सरकारी फंड को फर्जी बिलों के माध्यम से निकाला।
सिस्टम में सेंध: आईटी अधिनियम और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धज्जियां उड़ाते हुए सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये अपने निजी खातों और संपत्तियों में डाइवर्ट किए।
ED की अब तक की बड़ी कार्रवाई
गिरफ्तारी: इस घोटाले के मुख्य मास्टरमाइंड कमल राठौर को ईडी ने 07 अगस्त 2025 को ही गिरफ्तार कर लिया था।
तलाशी अभियान: छापेमारी के दौरान ईडी ने कई आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए और 25 लाख रुपये नकद जब्त किए।
संपत्ति कुर्की: पीएमएलए (PMLA) जांच के दौरान पता चला कि घोटाले के पैसों से आरोपियों ने कई अचल संपत्तियां खरीदी थीं। ईडी ने अब तक आरोपियों की 14 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क (Attach) किया है, जिनकी बाजार कीमत 4.3 करोड़ रुपये आंकी गई है।
अलीराजपुर पुलिस की FIR से शुरू हुई थी जांच
यह पूरा मामला अलीराजपुर के कट्ठीवाड़ा पुलिस स्टेशन में दर्ज प्राथमिकी (FIR) के बाद चर्चा में आया था। पुलिस ने आईपीसी की विभिन्न धाराओं के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था। चूंकि मामला मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा था, इसलिए ईडी ने इस केस को अपने हाथ में लिया और अपराध की कमाई (Proceeds of Crime) का पता लगाया।
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