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सर्बिया में छात्रों के आंदोलन ने बदली सत्ता की तस्वीर वुसिक ने स्वीकार की हार रूस से करीबी संबंधों वाले नेता के लिए बड़ा राजनीतिक झटका

October 26, 2026

नई दिल्ली । यूरोप (Europe)के बाल्कन क्षेत्र (Balkan region)के देश सर्बिया (Country: Serbia)में छात्र आंदोलन ने राजनीति की दिशा बदलने के संकेत दिए हैं। लंबे समय से सत्ता में प्रभाव रखने वाले नेता अलेक्जेंडर वुसिक (Leader Aleksandar Vučić)ने रविवार को हुए संसदीय चुनाव (parliamentary elections)के बाद अपनी हार स्वीकार कर ली। चुनाव में उनके राजनीतिक गठबंधन के सामने विश्वविद्यालय के छात्रों के समर्थन वाली स्टूडेंट्स लिस्ट ने मजबूत चुनौती पेश की। वुसिक के अपने अनुमान के मुताबिक छात्र समर्थित समूह को 250 सदस्यीय संसद में 135 से 140 सीटें मिल सकती हैं जबकि उनकी पार्टी को करीब 105 सीटें मिलने की संभावना है। इन अनुमानों के आधार पर छात्र आंदोलन से जुड़े समूह के बहुमत हासिल करने की उम्मीद बढ़ गई है। हालांकि अंतिम आधिकारिक नतीजों की पुष्टि के बाद ही सीटों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

करीब 14 साल से प्रभावशाली रहे वुसिक को झटका

अलेक्जेंडर वुसिक सर्बिया की राजनीति के प्रमुख चेहरों में रहे हैं। उनकी सर्बियन प्रोग्रेसिव पार्टी यानी SNS ने लंबे समय तक देश की सत्ता पर प्रभाव बनाए रखा। वुसिक वर्ष 2014 से देश की सरकार के शीर्ष पदों पर रहे हैं और बाद में राष्ट्रपति बने। उन्हें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ करीबी संबंध रखने वाले नेता के रूप में देखा जाता है। ऐसे में छात्र आंदोलन से जुड़े समूह का चुनाव में आगे निकलना सर्बिया की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

इस चुनाव में एक तरफ वुसिक की दक्षिणपंथी पार्टी थी तो दूसरी तरफ विश्वविद्यालयों के छात्रों के नेतृत्व वाला आंदोलन। छात्रों ने सरकार पर भ्रष्टाचार और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने के आरोप लगाए थे। आंदोलन को देश के अलग-अलग हिस्सों में समर्थन मिलने के बाद यह राजनीतिक चुनौती के रूप में उभरा।

रेलवे स्टेशन हादसे के बाद शुरू हुआ विरोध

सर्बिया में छात्र आंदोलन की शुरुआत नवंबर 2024 में नोवी साद शहर के रेलवे स्टेशन पर हुए हादसे के बाद हुई थी। स्टेशन की छतरी जैसी संरचना गिरने से 16 लोगों की मौत हो गई थी। घटना के बाद सरकारी जवाबदेही और कथित भ्रष्टाचार को लेकर सवाल उठने लगे। छात्रों ने हादसे की जिम्मेदारी तय करने और सरकारी संस्थानों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की।

धीरे-धीरे विरोध प्रदर्शन बड़े जन आंदोलन में बदल गए। विश्वविद्यालयों के छात्रों के साथ समाज के अन्य वर्गों ने भी सरकारी व्यवस्था में सुधार की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि भ्रष्टाचार और सत्ता के केंद्रीकरण ने लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रभावित किया है। सरकार और उसके समर्थकों ने आंदोलन को लेकर अलग-अलग सवाल उठाए लेकिन विरोध लगातार राजनीतिक चर्चा के केंद्र में बना रहा।

वुसिक ने हार के लिए विदेशी हस्तक्षेप को ठहराया जिम्मेदार

चुनावी कार्यक्रम में अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए वुसिक ने स्वीकार किया कि स्टूडेंट्स लिस्ट को जीत मिली है। हालांकि उन्होंने अपनी पार्टी के प्रदर्शन के लिए सर्बिया के स्वतंत्र मीडिया और कुछ यूरोपीय देशों के कथित हस्तक्षेप के साथ अमेरिकी डीप स्टेट को जिम्मेदार ठहराया। ये आरोप वुसिक की ओर से लगाए गए हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।

चुनाव से पहले देश में राजनीतिक तनाव बढ़ा हुआ था। छात्र आंदोलन के समर्थकों ने सरकार के खिलाफ जवाबदेही और संस्थागत सुधार की मांग की जबकि वुसिक ने आंदोलन को विदेशी साजिश से जोड़ने की कोशिश की थी। चुनाव के शुरुआती अनुमान अब इस राजनीतिक संघर्ष को एक नए मोड़ पर ले आए हैं।

नई सरकार के सामने होंगी बड़ी चुनौतियां

यदि अंतिम नतीजों में स्टूडेंट्स लिस्ट को बहुमत मिलता है तो उसके सामने सरकार गठन और प्रशासन चलाने की जिम्मेदारी होगी। भ्रष्टाचार की जांच सरकारी संस्थानों में पारदर्शिता और न्यायिक व्यवस्था में सुधार जैसे मुद्दे नई राजनीतिक व्यवस्था की परीक्षा लेंगे। इसके अलावा सर्बिया के लिए रूस और चीन के साथ संबंधों तथा यूरोपीय संघ की सदस्यता से जुड़े सवाल भी महत्वपूर्ण बने रहेंगे।

  • छात्र आंदोलन की चुनावी सफलता ने यह सवाल खड़ा किया है कि क्या सड़कों पर उठी मांगें अब सरकारी नीतियों में बदल पाएंगी। आने वाले दिनों में अंतिम चुनावी नतीजे और सरकार गठन की प्रक्रिया सर्बिया के राजनीतिक भविष्य की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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