img-fluid

बांग्लादेश ने चीन की जगह डेनमार्क की कंपनी पर जताया भरोसा, बंदरगाह परियोजनाओं में बदलाव से भारत को रणनीतिक फायदा

October 26, 2026

ढाका। बांग्लादेश में बंदरगाहों (Ports in bangladesh) के आधुनिकीकरण से जुड़ी परियोजनाओं (projects) में विदेशी कंपनियों की भागीदारी को लेकर चीन की रणनीतिक योजनाओं को झटका लगने की खबर है। रिपोर्टों के मुताबिक, बांग्लादेश ने समुद्री बंदरगाहों के विकास में चीन पर निर्भरता कम करते हुए अन्य देशों की कंपनियों के साथ समझौते किए हैं। चटगांव बंदरगाह प्राधिकरण ने डेनमार्क के मार्स्क समूह के साथ 30 साल का समझौता किया है। इस घटनाक्रम को बंगाल की खाड़ी में चीन की बढ़ती मौजूदगी को लेकर चिंतित भारत के रणनीतिक हितों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

चीन की जगह डेनमार्क की कंपनी को मिली जिम्मेदारी

रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश में बंदरगाह विकास की योजनाओं में चीन की भूमिका को लेकर पहले अलग तरह की चर्चा थी। मोंगला बंदरगाह की माल ढुलाई क्षमता बढ़ाने के लिए चीनी वित्तीय सहायता से दो आधुनिक कंटेनर जेटी बनाने की योजना थी। इन जेटी के निर्माण से बंदरगाह पर माल की आवाजाही और संचालन क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया था।

हालांकि, अब बंदरगाहों के विकास में दूसरे अंतरराष्ट्रीय संचालकों की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। चटगांव बंदरगाह प्राधिकरण और डेनमार्क के मार्स्क समूह के बीच 30 साल का समझौता इसी बदलाव का हिस्सा है।


  • चीन पर निर्भरता कम करने की कोशिश

    बांग्लादेश की सरकारें पिछले कुछ वर्षों से समुद्री बंदरगाहों के विकास के लिए विभिन्न देशों और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के साथ सहयोग करती रही हैं। इसका उद्देश्य बंदरगाह विकास को किसी एक देश पर निर्भर रखने के बजाय अलग-अलग साझेदारों की भागीदारी सुनिश्चित करना है।

    2025 में अंतरिम सरकार के कार्यकाल के दौरान जापान अंतरराष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (JICA) के रियायती ऋण से मातारबाड़ी बंदरगाह के विकास और चटगांव में लाडिया कंटेनर टर्मिनल से जुड़ी परियोजनाओं के लिए समझौते किए गए थे। इनमें डेनमार्क के मार्स्क समूह की भागीदारी भी शामिल थी।

    इन परियोजनाओं से बांग्लादेश को बंदरगाहों की क्षमता बढ़ाने, अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बेहतर बनाने और समुद्री परिवहन के बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    भारत के लिए क्यों अहम है यह घटनाक्रम?

    बंगाल की खाड़ी और बांग्लादेश के समुद्री बंदरगाह भारत की क्षेत्रीय सुरक्षा और व्यापारिक हितों के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। भारत के पूर्वोत्तर राज्यों की भौगोलिक स्थिति और समुद्री व्यापार मार्गों को देखते हुए बांग्लादेश के बंदरगाहों में किसी बाहरी शक्ति की बढ़ती रणनीतिक मौजूदगी पर नई दिल्ली की नजर रहती है।

    यदि बांग्लादेश बंदरगाहों के विकास में अलग-अलग देशों की कंपनियों को भागीदारी देता है, तो इससे किसी एक देश का प्रभाव सीमित रखने की संभावना बन सकती है। इसी वजह से चीन की जगह अन्य अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को प्राथमिकता दिए जाने की खबरों को भारत के रणनीतिक हितों के संदर्भ में देखा जा रहा है।

    हालांकि, किसी विदेशी कंपनी को बंदरगाह संचालन या विकास का ठेका मिलना अपने आप में सैन्य या रणनीतिक नियंत्रण हस्तांतरित होने के बराबर नहीं है। भारत को वास्तविक रणनीतिक लाभ कितना मिलेगा, यह समझौतों की शर्तों, बंदरगाहों के संचालन और क्षेत्रीय सहयोग की दिशा पर निर्भर करेगा।

    सोनादिया बंदरगाह परियोजना पर भी भारत की थी नजर

    बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के कार्यकाल में भी चीन की समुद्री क्षेत्र में बढ़ती व्यावसायिक मौजूदगी को लेकर भारत की चिंताओं का मुद्दा सामने आया था। रिपोर्टों के मुताबिक, हसीना ने चीनी सहायता से सोनादिया में गहरे समुद्र का बंदरगाह बनाने की योजना को मंजूरी नहीं दी थी।

    भारत के लिए चिंता का एक प्रमुख कारण यह था कि उसके निकट रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्रों में चीन की मौजूदगी बढ़ सकती है। ऐसे में बांग्लादेश की मौजूदा बंदरगाह विकास नीति में विविध अंतरराष्ट्रीय भागीदारी को क्षेत्रीय संतुलन के नजरिये से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    कुल मिलाकर, बांग्लादेश के बंदरगाहों के आधुनिकीकरण में डेनमार्क और जापान जैसे देशों की भागीदारी चीन की भूमिका के साथ एक वैकल्पिक व्यवस्था तैयार करती है। हालांकि, इसे चीन की सभी परियोजनाओं के रद्द होने या बांग्लादेश की नीति में पूरी तरह बदलाव के रूप में देखना अभी उचित नहीं होगा।

    Share:

  • बद्रीनाथ धाम का अद्भुत रहस्य: क्यों कहते हैं इसे भू-वैकुंठ और शीतकाल में कहां होते हैं भगवान बद्री के दर्शन?

    Mon Oct 26 , 2026
    नई दिल्ली । उत्तराखंड (Uttarakhand)के चमोली जिले (Chamoli district)में हिमालय (Himalaya)की ऊंची पहाड़ियों के बीच स्थित बद्रीनाथ धाम (Badrinath Dham)देश के सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में शामिल है। भगवान विष्णु को  (Lord Vishnu)समर्पित यह मंदिर चार धाम यात्रा का प्रमुख पड़ाव है। अलकनंदा नदी के किनारे बसे इस दिव्य धाम में हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन […]
    सम्बंधित ख़बरें
    लेटेस्ट
    खरी-खरी
    का राशिफल
    जीवनशैली
    मनोरंजन
    अभी-अभी
  • Archives

  • ©2026 Agnibaan , All Rights Reserved