
नई दिल्ली। चुनाव आयोग (Election Commission) ने उन राज्यों में ऑनलाइन फॉर्म-6 से SIR से जुड़ा अतिरिक्त घोषणा पत्र हटा दिया है, जहां विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। आयोग के इस फैसले पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके (Abhijeet Deepke) ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने फैसले पर संतोष जताने के साथ ही मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar) पर सवाल भी उठाया है।
दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर फॉर्म-6 में बदलाव से संबंधित खबर शेयर करते हुए लिखा- “पहले क्यों जरूरत थी, ज्ञानू?” उनका इशारा उस अतिरिक्त जानकारी की ओर था, जिसे SIR की प्रक्रिया के दौरान नए मतदाताओं से लिया जा रहा था।
अब सामान्य फॉर्म-6 ही भरना होगा
निर्वाचन आयोग के मुताबिक, SIR पूरा कर चुके राज्यों में ऑनलाइन फॉर्म-6 के साथ जुड़ा अतिरिक्त घोषणा पत्र अब हटा दिया गया है। आयोग की मौजूदा सेवाओं में Form-6 को नए मतदाता पंजीकरण के लिए वैधानिक फॉर्म के रूप में उपलब्ध कराया गया है।
आयोग के अनुसार यह अतिरिक्त घोषणा SIR की प्रक्रिया के लिए जोड़ी गई थी। इसके जरिए नए आवेदकों से यह जानकारी ली जाती थी कि वे, उनके माता-पिता या दादा-दादी पहले हुए किसी गहन पुनरीक्षण के दौरान तैयार मतदाता सूची में दर्ज थे या नहीं।
जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR अभी चल रहा है, वहां यह घोषणा व्यवस्था ECINet पर उपलब्ध रहेगी। जिन राज्यों में प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहां ECINet ऐप और पोर्टल के साथ संबंधित मुख्य निर्वाचन अधिकारी के पोर्टल से भी अतिरिक्त घोषणा वाला हिस्सा हटा दिया गया है। ऐसे राज्यों में नए मतदाता को अब ‘मतदाता पंजीकरण नियम, 1960’ के तहत निर्धारित मूल Form-6 ही भरना होगा।
26 सितंबर की बैठक के बाद हुआ बदलाव
यह फैसला मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी वाले पूर्ण आयोग की 26 सितंबर की बैठक के बाद सामने आया। चुनाव आयोग की मौजूदा वेबसाइट पर ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त और सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी चुनाव आयुक्त के तौर पर दर्ज हैं।
आयोग ने स्पष्ट किया था कि Form-6 के साथ लगाई गई घोषणा SIR की जरूरत के लिए थी। यानी इसे सामान्य मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया का स्थायी हिस्सा नहीं बताया गया।
फॉर्म-6 को लेकर पहले भी उठे थे सवाल
इस व्यवस्था को लेकर पहले भी सवाल उठ चुके हैं। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयोग के भीतर कुछ फैसलों और आदेशों को लेकर चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीने की अवधि में कम से कम 14 बार आपत्तियां दर्ज कराई थीं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि कुछ मामलों में दोनों अधिकारियों ने फैसले उनकी जानकारी के बिना लिए जाने की बात कही थी।
रिपोर्ट के मुताबिक, Form-6 से जुड़े बदलाव का मुद्दा भी इन आपत्तियों में शामिल था। विवेक जोशी ने कथित तौर पर इस बदलाव पर यह आपत्ति जताई थी कि ‘मतदाता पंजीकरण नियम, 1960’ के तहत निर्धारित फॉर्म में नियमों में संशोधन किए बिना बदलाव नहीं किया जा सकता। संधू ने भी इस आपत्ति से सहमति जताई थी।
ऑनलाइन Form-6 प्रक्रिया में SIR से जुड़ी घोषणा जोड़े जाने के बाद संधू ने फिर इस पर आपत्ति जताई थी और इसे हटाने की मांग की थी। हालांकि, इन आपत्तियों और उनके संदर्भ में संबंधित रिपोर्ट के दावों को आयोग के आधिकारिक फैसले से अलग समझना जरूरी है।
CJP ने 2 अक्टूबर को प्रदर्शन की बात कही
फॉर्म-6 से जुड़े फैसले के बीच अभिजीत दीपके ने मुंबई में प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर भी प्रतिक्रिया दी है। उनके मुताबिक, मुंबई पुलिस की ओर से अनुमति नहीं दिए जाने के बावजूद CJP 2 अक्टूबर को शिवाजी पार्क में विरोध प्रदर्शन करेगी।
दीपके ने पुलिस के फैसले की आलोचना करते हुए आरोप लगाया है कि यह नागरिकों की आवाज दबाने की कोशिश है। उन्होंने कहा है कि अगर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई तो CJP गांधी जयंती के दिन ‘जेल भरो आंदोलन’ शुरू करेगी।
SIR को लेकर राजनीतिक दलों की ओर से चुनाव आयोग पर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। ऐसे में Form-6 से अतिरिक्त घोषणा हटाने का फैसला भी इसी व्यापक विवाद के बीच आया है। चुनाव आयोग ने हालांकि इसे SIR की प्रक्रिया से जुड़ी व्यवस्था बताते हुए संबंधित राज्यों में प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसे हटाने की बात कही है।
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