ढाका । बांग्लादेश सरकार (Government of bangladesh) की एक समीक्षा समिति ने सोमवार को कहा कि उसने भारतीय समूह अडानी (Adani) के साथ हुए अरबों डॉलर के बिजली आपूर्ति समझौते में ‘गंभीर विसंगतियां’ पाई हैं। यह समझौता बांग्लादेश की कुल बिजली आवश्यकता का लगभग 10% हिस्सा पूरा करता है। ढाका की यह समिति उन बिजली सौदों की जांच कर रही है, जो पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार के दौरान किए गए थे। शेख हसीना सरकार को अगस्त 2024 में एक विद्रोह के बाद सत्ता से हटा दिया गया था। इसके बाद से भारत और बांग्लादेश के संबंधों में तनाव देखा गया है।
डील और वित्तीय प्रभाव
भारत के झारखंड राज्य में स्थित अडानी का कोयला आधारित गोड्डा प्लांट 2 अरब डॉलर की परियोजना है। यह 2024 में शुरू हुई थी और बांग्लादेश की 13 गीगावॉट (GW) की बेसलोड मांग का 7 से 10 प्रतिशत हिस्सा पूरा करती है। बांग्लादेश इस 25-वर्षीय कॉन्ट्रैक्ट के तहत अडानी को सालाना 1 अरब डॉलर का भुगतान करता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि BPDB को वर्ष 2024-25 में 4.13 अरब डॉलर का घाटा हुआ है।
अडानी पावर की प्रतिक्रिया
अडानी पावर के प्रवक्ता ने इन आरोपों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने अभी तक रिपोर्ट नहीं देखी है। उनका दावा है कि वे सबसे अधिक प्रतिस्पर्धी कीमतों में से एक पर बिजली की आपूर्ति कर रहे हैं। कंपनी ने ढाका सरकार से आग्रह किया है कि वह बिजली के बदले अपना बकाया चुकाए। प्रवक्ता ने कहा- हमने बड़ी मात्रा में बकाया राशि होने के बावजूद अपनी आपूर्ति प्रतिबद्धता का सम्मान किया है, जबकि कई अन्य उत्पादकों ने आपूर्ति कम कर दी है या रोक दी है। अडानी ग्रुप का कहना है कि बांग्लादेश पर उसके बहुत रुपये बकाया हैं लेकिन इसके बावजूद उन्होंने पड़ोसी देश की बिजली नहीं काटी है।
समिति की सिफारिशें
ढाका समिति ने इसे अत्यावश्यक बताया है कि इन कॉन्ट्रैक्ट की जांच की जाए। इसने अपनी मुख्य सिफारिशों में कहा कि जिन कॉन्ट्रैक्ट में भ्रष्टाचार के प्रत्यक्ष प्रमाण मिलते हैं, उन्हें सरकार और BPDB द्वारा रद्द कर दिया जाना चाहिए। निजी पार्टियों के साथ कीमतों और शर्तों पर फिर से बातचीत की जानी चाहिए ताकि कीमतों को बाजार के प्रतिस्पर्धी स्तर पर लाया जा सके।
अगर समझौता रद्द या रिवाइज हुआ तो बांग्लादेश में बिजली संकट गहरा सकता है, क्योंकि भारत से कुल 2200-2300 MW बिजली आती है और अडानी का हिस्सा सबसे बड़ा है। अडानी पावर का कहना है कि वे बकाया होने के बावजूद बांग्लादेश को बिजली सप्लाई जारी रखे हैं।
यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब बांग्लादेश भारी राजनीतिक उथल-पुथल से गुजर रहा है। शेख हसीना की सरकार के गिरने के बाद घरेलू राजनीति और क्षेत्रीय समीकरणों में बड़ा बदलाव आया है। दक्षिण एशियाई देश में 12 फरवरी को नई संसद और नेतृत्व चुनने के लिए मतदान होना है।
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