नई दिल्ली। अज़रबैजान (Azerbaijan) ने ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के दौरान पाकिस्तान (Pakistan) का समर्थन किया था, लेकिन अब वही देश भारत के साथ रिश्तों को नई दिशा देने की कोशिश कर रहा है। दोनों देशों ने बाकू में उच्च स्तरीय कूटनीतिक वार्ता कर द्विपक्षीय संबंधों को रीसेट करने की प्रक्रिया शुरू की है।
भारत के विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने अज़रबैजान की यात्रा कर ‘विदेश कार्यालय परामर्श’ के छठे दौर में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। कई वर्षों बाद हुई इस व्यापक बातचीत को राजनीतिक विश्वास बहाल करने और सहयोग के नए अवसर तलाशने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
ऑपरेशन सिंदूर और मतभेद की पृष्ठभूमि
अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने 7 से 10 मई के बीच ऑपरेशन सिंदूर चलाया। इस दौरान पाकिस्तान और पीओके में आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया गया। कार्रवाई के समय अज़रबैजान और तुर्की ने पाकिस्तान का समर्थन करते हुए भारत की आलोचना की थी। इसके बाद भारत में ‘बॉयकॉट’ की मांग उठी और दोनों देशों के रिश्तों में ठंडापन आ गया।
नई वार्ता में क्या हुआ
अज़रबैजान के विदेश मंत्री जेहुन बायरामोव के साथ हुई बैठक में व्यापार, टेक्नोलॉजी, ऊर्जा, पर्यटन, फार्मास्यूटिकल्स, सांस्कृतिक सहयोग और आतंकवाद विरोधी सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। भारत ने व्यापक एजेंडा रखा, जबकि अज़रबैजान ने आर्थिक और व्यावहारिक सहयोग पर जोर दिया।
अज़रबैजान ने यह भी संकेत दिया कि नागोर्नो-काराबाख विवाद के दौरान भारत के रुख को लेकर मतभेद रहे हैं, लेकिन बातचीत जारी रखने पर दोनों पक्ष सहमत हुए।
बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा, खासकर मध्य-पूर्व के हालात पर चर्चा हुई। भारत ने ईरान से 200 से अधिक भारतीयों की सुरक्षित निकासी में अज़रबैजान की मदद के लिए आभार जताया। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के दौरान अज़रबैजान ने अपना लैंड बॉर्डर रूट खोलकर भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकलने में सहयोग दिया।
अन्य मुलाकातें और आगे की योजना
सिबी जॉर्ज ने अज़रबैजान के राष्ट्रपति के विदेश नीति सलाहकार हिकमत हाजियेव से भी मुलाकात की। विदेश कार्यालय परामर्श की सह-अध्यक्षता अज़रबैजान के उप विदेश मंत्री एलनुर मम्मादोव ने की। इस दौरान भारत के राजदूत अभय कुमार भी मौजूद रहे।
दोनों देशों ने तय किया कि वार्ता का अगला दौर नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा। बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच यह संवाद भारत-अज़रबैजान संबंधों में नई शुरुआत का संकेत माना जा रहा है।
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