
नई दिल्ली। अमेरिका (America) द्वारा 66 अंतरराष्ट्रीय संगठनों (66 International Organizations) से हटने के फैसले के बाद भारत ने बहुपक्षवाद के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा कि वैश्विक चुनौतियों (Global challenges) से निपटने के लिए परामर्श और सहयोग आधारित सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। विदेश मंत्रालय की यह प्रतिक्रिया अमेरिका के उस फैसले के संदर्भ में आई है, जिसमें उसने भारत–फ्रांस के नेतृत्व वाले इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA) समेत कई संयुक्त राष्ट्र और गैर–संयुक्त राष्ट्र संस्थाओं से खुद को अलग करने की घोषणा की है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने अपने साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि अमेरिका के फैसले के बावजूद भारत इंटरनेशनल सोलर अलायंस के उद्देश्यों को आगे बढ़ाता रहेगा। उन्होंने कहा, “हमने अमेरिका द्वारा विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संगठनों और संयुक्त राष्ट्र निकायों से हटने की घोषणा देखी है। अमेरिका ने इंटरनेशनल सोलर अलायंस से भी बाहर निकलने का फैसला किया है, लेकिन भारत इसके लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।”
125 देशों का मंच है ISA
रणधीर जायसवाल ने बताया कि ISA की स्थापना के बाद से सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने और सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाने में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। उन्होंने कहा, “इंटरनेशनल सोलर अलायंस में इस समय 125 देश शामिल हैं। भारत इसके उद्देश्यों को आगे बढ़ाने और वैश्विक स्तर पर सौर ऊर्जा के विस्तार के लिए काम करता रहेगा।” MEA प्रवक्ता ने भारत के व्यापक दृष्टिकोण को रेखांकित करते हुए कहा, “भारत बहुपक्षवाद के पक्ष में खड़ा है और मानता है कि वैश्विक मुद्दों का समाधान सभी देशों के परामर्श और सहयोग से ही संभव है।”
अमेरिका का फैसला: 66 संगठनों से अलगाव
गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को एक प्रेसिडेंशियल मेमोरेंडम पर हस्ताक्षर कर 66 अंतरराष्ट्रीय संगठनों, संधियों और गठबंधनों से अमेरिका को अलग करने का निर्देश दिया। यह निर्णय कार्यकारी आदेश 14199 के तहत की गई समीक्षा के बाद लिया गया, जिसमें अमेरिका की सदस्यता, फंडिंग और समर्थन वाले सभी अंतरराष्ट्रीय संगठनों का आकलन किया गया है।
अमेरिकी हितों के खिलाफ बताई गई संस्थाएं
बता दें कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी प्रतिनिधि के साथ मिलकर एक रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें कुछ संगठनों को “अमेरिकी हितों के अनुरूप नहीं” बताया गया है। इसके बाद कैबिनेट सदस्यों से परामर्श कर राष्ट्रपति ने फैसला किया कि इन संस्थाओं में अमेरिका की निरंतर भागीदारी देश के हित में नहीं है।
ISA: भारत–फ्रांस की अहम पहल
इंटरनेशनल सोलर अलायंस भारत और फ्रांस के नेतृत्व वाली एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसमें 125 सदस्य देश शामिल हैं। ISA का मुख्य लक्ष्य सौर ऊर्जा को बढ़ावा देना और 2030 तक सौर निवेश में 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर जुटाना है। इस गठबंधन का विचार 2015 में पेरिस में COP21 जलवायु सम्मेलन के दौरान रखा गया था। इस गठबंधन से अमेरिका की वापसी वैश्विक जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रयासों के लिए एक बड़ा झटका है।
इस अलायंस से अमेरिका की वापसी के बावजूद भारत ने साफ कर दिया है कि वह बहुपक्षीय संस्थाओं में विश्वास रखता है और ISA जैसी पहलों का नेतृत्व करता रहेगा और जलवायु परिवर्तन व ऊर्जा सुरक्षा जैसे वैश्विक मुद्दों पर सहयोग को प्राथमिकता देगा। यह घटनाक्रम वैश्विक मंच पर एक स्पष्ट विभाजन को उजागर करता है, जिसमें एक तरफ अमेरिका का अलगाववाद है, और दूसरी तरफ भारत जैसे देशों का सहयोग का आह्वान। ऐसे में महत्वपूर्ण सवाल सिर्फ यह नहीं है कि भविष्य की चुनौतियों का समाधान कैसे होगा, बल्कि यह है कि इन समाधानों का नेतृत्व कौन करेगा?
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