
छिंदवाड़ा। छिंदवाड़ा जिले के जुन्नारदेव ब्लॉक में सड़क की बदहाली ने एक गर्भवती महिला की जिंदगी को मुश्किल में डाल दिया। चीटीपाठा जामुनडोंग टोले में गुरुवार सुबह प्रसव पीड़ा शुरू होने के बाद महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को करीब 8 किलोमीटर तक डोली के सहारे पैदल चलना पड़ा। गांव तक सड़क नहीं होने के कारण 108 एंबुलेंस भी टोले तक नहीं पहुंच सकी। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने जांच के बाद गर्भस्थ शिशु की मौत की पुष्टि की। महिला की हालत गंभीर होने पर उसे आईसीयू में भर्ती किया गया है।
जानकारी के अनुसार, चीटीपाठा जामुनडोंग निवासी सोनू मलगाम की पत्नी कुस्तरिया को गुरुवार सुबह अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिजनों ने तत्काल मदद के लिए 108 एंबुलेंस को सूचना दी, लेकिन पक्की सड़क नहीं होने के कारण एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी। इसके बाद सरपंच, परिजनों और ग्रामीणों ने मिलकर लकड़ी व कपड़े की मदद से डोली तैयार की।
प्रसव पीड़ा से परेशान महिला को डोली में बैठाया गया और ग्रामीण उसे लेकर पैदल ही गांव से बाहर निकले। करीब 8 किलोमीटर का दुर्गम रास्ता तय करने के बाद महिला को गोप गांव तक पहुंचाया गया। यहां से 108 एंबुलेंस से उसे दमुआ स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने महिला को जिला अस्पताल रेफर कर दिया। जिला अस्पताल में जांच के बाद डॉक्टरों ने गर्भस्थ शिशु की मौत की पुष्टि की। परिजनों के मुताबिक, अस्पताल पहुंचने से पहले महिला को लंबे समय तक दुर्गम रास्ते पर डोली के सहारे ले जाना पड़ा। फिलहाल महिला का आईसीयू में उपचार चल रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार, चीटीपाठा जामुनडोंग टोले में करीब 125 परिवार रहते हैं। उनका कहना है कि सड़क की मांग कोई नई नहीं है। ग्रामीण वर्ष 2016 से प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से पक्की सड़क निर्माण की मांग करते आ रहे हैं। इसके बावजूद अब तक सड़क निर्माण नहीं हो सका है।
ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के दिनों में कच्चा रास्ता कीचड़ और फिसलन से भर जाता है। ऐसे में सामान्य आवागमन भी मुश्किल हो जाता है। मरीजों और गर्भवती महिलाओं के लिए स्थिति और गंभीर हो जाती है। आपात स्थिति में एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती और मरीज को मुख्य सड़क तक पैदल या डोली से ले जाना पड़ता है।
इस घटना के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से सवाल किया है कि जब गांव तक एंबुलेंस पहुंचने के लिए सड़क ही नहीं है, तो गंभीर मरीजों को समय पर इलाज कैसे मिलेगा। ग्रामीणों ने टोले तक पक्की सड़क बनाने के साथ ही स्वास्थ्य और आपातकालीन परिवहन की स्थायी व्यवस्था की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि आपात स्थिति में किसी की जान बचाने का रास्ता भी है।
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