नई दिल्ली। वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों (Global security challenges) और हिंद-प्रशांत क्षेत्र (Indo-Pacific region) में बढ़ती सामरिक प्रतिस्पर्धा के बीच अमेरिका ने अपने नौसैनिक बेड़े को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी नौसेना के लिए 14 नई परमाणु पनडुब्बियों (Indo-Pacific region) के निर्माण पर करीब 76.6 अरब डॉलर (लगभग 6.4 लाख करोड़ रुपये) खर्च किए जाएंगे। यह राशि भारत के हालिया वार्षिक रक्षा बजट के लगभग बराबर मानी जा रही है।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस परियोजना का उद्देश्य अमेरिका की समुद्री सैन्य क्षमता को मजबूत करना और भविष्य की रणनीतिक चुनौतियों के लिए नौसेना को तैयार करना है।
14 नई पनडुब्बियों पर होगा विशाल निवेश
अमेरिकी नौसेना की इस परियोजना के तहत दो प्रमुख रक्षा कंपनियों—जनरल डायनेमिक्स इलेक्ट्रिक बोट और हंटिंगटन इंगल्स इंडस्ट्रीज—को बड़े रक्षा अनुबंध दिए गए हैं।
9 वर्जीनिया क्लास (Virginia-class) परमाणु अटैक पनडुब्बियां (SSN) तैयार की जाएंगी, जिन पर लगभग 42 अरब डॉलर खर्च होंगे।
5 कोलंबिया क्लास (Columbia-class) बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां (SSBN) बनाई जाएंगी, जिनकी अनुमानित लागत 29.5 अरब डॉलर है।
इसके अलावा करीब 5 अरब डॉलर जहाज निर्माण क्षमता बढ़ाने, सप्लाई चेन मजबूत करने और कुशल मानव संसाधन विकसित करने पर खर्च किए जाएंगे।
चीन को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही रणनीति
विश्लेषकों का मानना है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की तेजी से बढ़ती नौसैनिक शक्ति के बीच अमेरिका अपने समुद्री प्रभुत्व को बनाए रखने के लिए लगातार निवेश बढ़ा रहा है। नई पनडुब्बियां अमेरिकी नौसेना की लंबी अवधि की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा होंगी।
ओहायो क्लास की जगह लेंगी कोलंबिया क्लास
नई कोलंबिया क्लास पनडुब्बियां अमेरिका की पुरानी ओहायो क्लास बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियों का स्थान लेंगी। ओहायो क्लास की पनडुब्बियां 1981 से 1997 के बीच अमेरिकी नौसेना में शामिल की गई थीं और अब धीरे-धीरे उन्हें सेवा से हटाया जा रहा है।
अमेरिका की योजना कुल 12 कोलंबिया क्लास पनडुब्बियां विकसित करने की है, जो 2080 के दशक तक उसकी समुद्र आधारित परमाणु प्रतिरोधक क्षमता (Sea-based Nuclear Deterrence) को बनाए रखेंगी।
ट्राइडेंट-II मिसाइलों से होंगी लैस
कोलंबिया क्लास पनडुब्बियों में Trident-II D5 परमाणु बैलिस्टिक मिसाइलें तैनात की जाएंगी। इन्हें अमेरिका के न्यूक्लियर ट्रायड (भूमि, वायु और समुद्र आधारित परमाणु क्षमता) के समुद्री हिस्से की सबसे अहम कड़ी माना जाता है।
ये पनडुब्बियां किसी भी संभावित परमाणु हमले की स्थिति में अमेरिका की सेकेंड स्ट्राइक क्षमता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
भारत के रक्षा बजट के बराबर खर्च
भारत का हालिया वार्षिक रक्षा बजट लगभग 85 अरब डॉलर रहा है। ऐसे में केवल 14 नई अमेरिकी पनडुब्बियों पर होने वाला प्रस्तावित निवेश लगभग भारत के पूरे एक वर्ष के रक्षा बजट के बराबर है। इससे अमेरिका की समुद्री सैन्य आधुनिकीकरण परियोजना के पैमाने का अंदाजा लगाया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका, चीन और अन्य प्रमुख शक्तियों के बीच समुद्री प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है, जिसमें अत्याधुनिक पनडुब्बियां रणनीतिक संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएंगी।
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