ऊंट का आंसू से बनती है सांप के जहर को तोड़ने वाली दवा, जानिए कैसे ?

नई दिल्‍ली (New Delhi) । ऊंट (Camel) का आंसू (tears) बहुत करामाती माना जाता है, इससे सांप के जहर (snake venom) को तोड़ने वाली दवा (Medicine) तैयार की जाती है. रिसर्च कहती हैं कि ऊंट के आंसू में जो रसायन होते हैं, उससे जहरीले से जहरीले सांप के जहर की काट तैयार की जा सकती है.

एक रिसर्च कहती है कि ऊंट का आंसू बहुत करामाती होता है. इसमें सांप के खतरनाक जहर की ऐसी काट मिली है, जो आने वाले समय लोगों की जिंदगियां बचाने में बहुत काम आने वाली है. दुनियाभर में करीब सवा लाख (1,25,000) हर साल सांप के काटने से मर जाते हैं. सांप अगर खासा जहरीला हो तो उसका काटा कोई शख्स बच नहीं पाता. (Dubai)

ऐसे में अगर कोई रिसर्च ये बताए कि ऐसे में ऊंट का आंसू सांप के जहर से लड़ने में काम आए तो इससे अच्छी बात क्या हो सकती है. दुबई कि सेट्रल वेटेनरी रिसर्च लैबोरेटरी (सीवीआरएल) ने एक रिसर्च के बाद दावा किया है कि ऊंट के आंसू का इस्तेमाल करके सांप के जहर की काट तैयार की जा सकती है.

हालांकि दुबई की इस लैब की ये रिसर्च कई साल पहले हुई लेकिन फंड की कमी के कारण आगे नहीं बढ़ सकती. लेकिन अब सीवीआरएल को उम्मीद है कि धन की व्यवस्था हो जाएगी और उनका प्रोजेक्ट आगे बढ़ सकेगा.

इस रिसर्च केंद्र के प्रमुख डॉक्टर वार्नेरी कहते हैं कि इसमें कोई शक नहीं कि ऊंट के आंसू में जो एंटीडोट्स होते हैं, उससे सबसे प्रभावकारी ऐसी दवा बनेगी जो सांप के जहर का सबसे असरदार तरीके से काट कर सकती है. दुनिया में घोड़ों और भेड़ों के जरिए सांप के जहर को काट करने वाली दवा बनाई जाती है.

ऊंट के आंसुओं में कई तरह के प्रोटीन्‍स पाए जाते हैं. ये उसे इन्‍फेक्‍शन से भी बचाते हैं. ये आंसू इतना चमत्कारिक है कि इनसे सांप के जहर की काट तैयार की जा रही है. अमेरिका, भारत और कई देशों में ऊंट के आंसुओं पर रिसर्च चल रही है.

वैज्ञानिकों का कहना है ऊंट के आंसू से सांप के जहर का एंटीडोट तैयार किया जा सकता है. माना जा रहा है कि दुनिया के सबसे जहरीले सांपों की काट इसके आंसू से बनाई जा रही है. उनसे मनुष्यों के आंखों की भी कई तरह की बीमारियों का इलाज खोजा जा रहा है. ऊंट के दूध की खूब मांग है, ये ना केवल खासा महंगा बिकता है बल्कि फायदेमंद भी है.

ऊंट के आंसुओं में लाइसोजाइम्‍स होते हैं जो बैक्‍टीरिया, वायरसों और कीड़ों को रोकते हैं. आंसू ही नहीं उसके मूत्र में भी चिकित्सीय ताकत होती है, जिसका इस्तेमाल भी होता रहा है.

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