मतानी के रसूख के समक्ष बौना साबित हो रहा है पुलिस विभाग

  • एक साल बाद भी खाकी के हाथ खाली
  • लोन घोटाले का सबसे बड़ा आरोपी मतानी अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर, पुलिस तंत्र पर उठ रहे सवाल!!!!!

जबलपुर। अग्निबाण द्वारा विजयनगर स्थित यूनियन बैंक में हुए लोन घोटाले को लेकर क्रमवार तरीके से परत दर परत खुलासे करता आया है। घोटाले की तफ्तीश की गई तो एक नई बात सामने आई है जिसमें कि बैंक मैनेजर ने शहर के राइस मिल व्यापारी मतानी ब्रदर्स के साथ मिलकर पहले भी करोड़ों का घोटाला किया है। जिसमें 25 से 30 आवेदकों के नाम से उद्योग लगाने की बात पर कागज दिखाए गए और लोन बैंक मैनेजर द्वारा लोन सैंशन कर दिया गया।। दूसरी तरफ आज 1 साल बीत जाने के उपरांत भी पुलिस के हाथ मतानी की गिरफ्तारी के सवाल पर खाली हैं । क्राइम ब्रांच के कुछ अधिकारियों द्वारा मामले की जांच की जा रही थी परंतु आज तक मामले में किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं हुई। बाकायदा मतानी हर महीने 4 से 5 बार शहर में आकर अपने रसूख के दम पर इन अधिकारियों को सेट करके और विभिन्न कार्यों के चलते शहर में अभी भी अपने ठगी का जाल बिछाए हुए हैं। उन घोटाले मामले पर सुरेश मतानी का पूरा परिवार आरोपी था, जिसमें की मुख्य आरोपी सुरेश मतानी भाई महेश मतानी, पत्नी कशिश मतानी और बहन मुस्कान आहूजा भी आरोपी है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मतानी ब्रदर्स बैंक मैनेजर के साथ में मिलाकर छोटे तबकों के लोगों के कागज दिखाकर मैनेजर के साथ कम से कम 20 करोड़ का घोटाला किया है। इसके पूर्व भी 5 करोड़ के लोन घोटाले की बात सामने आई थी। सबसे दिलचस्प बात यह है कि मामले की जानकारी थाना पुलिस को है परंतु अभी तक इन व्यापारियों को गिरफ्तार ना करते हुए पुलिस भी हाथ पर हाथ धरे बैठी है। मतानी ब्रदर्स द्वारा किए गए बैंक घोटाले की बात जब सामने आई तो बैंक अधिकारियों द्वारा इन उद्योगों की जांच की गई। जहां पर उद्योग सिर्फ कागजों पर ही दिखे जिन जगहों का पता फॉर्म में डाला गया वहां पर किसी भी प्रकार के कोई उद्योग संचालित नहीं किए जा रहे थे। यह भी घोटाला बैंक मैनेजर ने लॉकडाउन का फायदा उठाते वक्त किया। पूरे घोटाले में मतानी ब्रदर्स का पूरा परिवार भी शामिल है।


पल्ला झाड़ते दिखे अधिकारी
मामले से संबंधित जब क्राइम ब्रांच के सीनियर अधिकारी डीएसपी सुशील सिंह चौहान से बात करने की कोशिश की गई तो ठग मतानी के मामले में क्राइम ब्रांच के इस सीनियर अधिकारी ने बात करना ही मुनासिब नहीं समझा अर्थात कहीं ना कहीं मामले से पल्ला झाड़ते नजर आए। जिस प्रकार से जांच अधिकारी मामले में जवाब देने से बचते नजर आ रहे हैं, वह इस बात को इंगित कर रहा है कि दाल में जरूर कुछ काला है।

ऐसे आया सामने मामला
कमल कुमार मिश्रा तत्कालीन शाखा प्रबंधक यूनियन बैंक ऑफ इंडिया शाखा विजयनगर जबलपुर द्वारा मिलीभगत कर षडयंत्रपूर्वक विभिन्न हितग्राहियों को 10-10 लाख रुपए का लोन दिलाने के नाम पर लोन फार्म भरवाकर कई दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए। हितग्राहियों के आधार कार्ड, पेन कार्ड, फोटो इत्यादि लेकर उनका उपयोग कर कूटरचित दस्तावेज, किरायानामा, लोन स्वीकृति के पूर्व एवं लोन स्वीकृति के पश्चात की शाखा प्रबंधक कमल कुमार मिश्रा की कूटरचित रिपोर्ट के आधार पर उनके नाम के 10-10 लाख रुपए लोन स्वीकृत कराया। लोन की स्वीकृत राशि में से 1,70,80000 रुपए बिना ट्रांसफर वाउचर, बिना हस्ताक्षरित ट्रांसफर वाउचर से तत्काल ओएमपी एसोसिएट्स संगीता पटेल, सचिन पटेल, पिंकी विश्वकर्मा एवं अन्य के विभिन्न खातों में ट्रांसफर कर इस राशि गबन किया। जांच पर कमल कुमार मिश्रा तत्कालीन शाखा प्रबंधक यूनियन बैंक ऑफ इंडिया शाखा विजयनगर जबलपुर, सचिन पटेल प्रोप्राइटर ओएमपी एसोसिएट्स जबलपुर, संगीता पटेल, पिंकी विश्वकर्मा, प्रियम तिवारी एवं अन्य के विरूद्ध अपराध धारा 409, 420, 467, 468, 471, 120बी भादवि एवं धारा 7 (सी) अनिअ 1988 संशो 2018 का अपराध अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया है। अब तक 21 हितग्राहियों की ऋण राशि को गबन करने के साक्ष्य प्राप्त हुए है। बैंक मैनेजर फरार तो जरूर है परंतु वह कहीं ना कहीं मामले को रफा-दफा करने के लिए सेटिंग करने में लगा हुआ है। बाकायदा इस मामले की सेटिंग शहर के एक भूतपूर्व पुलिस अधिकारी द्वारा की जा रही है। जिस प्रकार से आरोपी शाखा प्रबंधक कमलकुमार मिश्रा ने ओएमपी एसोसिएट के संचालक सचिन पटेल के साथ मिलकर 1 करोड़ 70 लाख 80 हजार रुपए के गबन किया जिसके बाद पूरे बैंक महकमे में हल्ला मच गया था । ईओडब्ल्यू में मामला दर्ज होते ही कहीं न कहीं बैंक मैनेजर ने आगे की कार्यवाही को भांप लिया । और वह फरार हो गया। अग्निबाण को मिली जानकारी के अनुसार बैंक मैनेजर व ओ एम पी एसोसिएट के संचालक सचिन पटेल ने मामले को सेटल करने के लिए रिटायर्ड पुलिस अधिकारी की सहायता ली है। सूत्रों के अनुसार बैंक मैनेजर कमल कुमार मिश्रा एवं सचिन पटेल बस इस घोटाले में शामिल नहीं है। ऐसा ही घोटाला मतानी ब्रदर्स क्योंकि राइस मिल के व्यापारी हैं उनके साथ मिलकर बैंक मैनेजर द्वारा किया गया।

Leave a Comment