
डेस्क: ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध को रुकवाने की मध्यस्थता कर रहे पाकिस्तान का हर पैंतरा फेल हो रहा है. दोनों के बीच डील कराने में भी उसे कामयाबी नहीं मिली है. हालांकि पाकिस्तान ने सूचना खबरी की भूमिका के लिए बहुत कुछ दांव पर लगा रखा है. ये भी सामने आया है कि आसिम मुनीर ईरान युद्ध का फायदा उठाकर अपनी जेब गर्म करना चाहते हैं. आइए जानते हैं कि पाकिस्तान इस वक्त दलाल की भूमिका में क्यों है?
आपको याद होगा अमेरिका का रूजवेल्ट होटल, जिसका स्वामित्व पाकिस्तान के पास था. अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के आसिम मुनीर ने विटकॉफ के साथ संबंधों को बेहतर करने के लिए उसका सौदा कर लिया.
रूजवेल्ट होटल का सौदा करने से पहले पाकिस्तान के वित्त मंत्री ने World Liberty Financial के एक सहयोगी संगठन के साथ समझौता किया था. यह एक क्रिप्टो स्टार्ट अप से जुड़ा है. अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इसका संबंध भी विटकॉफ से है. अब बड़ा सवाल यह है कि क्या विटकॉफ से बातचीत के लिए पाकिस्तान ने इतनी बड़ी क़ीमत चुका दी. इतनी बड़ी कीमत चुकाने के बावजूद आसिम मुनीर की मध्यस्थता में कोई भूमिका नहीं है.
इसीलिए पाकिस्तान की ओर से किए गए तमाम दावे झूठे साबित हो रहे हैं. सबसे बड़ा उदाहरण यह है कि अमेरिका और ईरान के बीच कल कोई डील नहीं हो पाई. आसिम मुनीर अपने निज़ी फायदों को आगे रख रहे हैं. वैसे भी पश्चिम एशिया में कोई भी देश पाकिस्तान की मध्यस्थता की भूमिका को मान्यता ही नहीं दे रहा है. सूत्रों के हवाले से यह खबर आ रही है कि पाकिस्तान क्षेत्र में शांति की बजाय अपने सौदे और फायदों को प्राथमिकता देने का विफल प्रयास कर रहा है.
पाकिस्तान की ओर से अभी तक जितने भी दावे किए गए हैं, वो सब गलत निकले हैं. सच्चाई यह है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भी पाकिस्तान के 20 जहाज नहीं गुजर पाए, लेकिन पाकिस्तान ने इस पर झूठ फैलाया. पड़ोसी देश पर अब UAE का कर्जा वापस देने का दबाव बहुत ज्यादा बढ़ गया है. यूएई ने अपना पैसा वापस मांग लिया है क्योंकि सभी को पता है कि पाकिस्तान कैसे पैसों का दुरुपयोग करता है. पाकिस्तान के अंदर ही कई पत्रकार सऊदी डिफेंस पैक्ट पर भी अब सवाल उठा रहे हैं.
ईरान युद्ध में मध्यस्थता कराने की खबरें पाकिस्तान इंटरनेशनल मीडिया में ख़ूब प्लांट करा रहा है, लेकिन उसकी भूमिका ना के बराबर है. खबर का आदान-प्रदान जो पाकिस्तान कर भी रहा है, उससे सीजफायर की कोई भी उम्मीद अब तक नहीं दिखी है. इसका मतलब साफ है कि पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर पैसों के दम पर अपनी भूमिका शांति वार्ता में दिखाना चाहते हैं, लेकिन उन्हें मुंह की खानी पड़ रही है.
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