
नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के ग्वालियर(Gwalior, Madhya Pradesh) स्थित पुलिस ट्रेनिंग सेंटर (PTC) में प्रशिक्षण ले रहे(undergoing training at the Police Training Center) 36 राजस्थान पुलिस के रंगरूटों को गंभीर अनुशासनहीनता के चलते उनके गृह राज्य वापस भेज दिया गया है। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADGP) राजा बाबू सिंह(Raja Babu Singh) ने बताया कि यह कार्रवाई तब की गई जब जांच में सामने आया(investigation revealed) कि इन जवानों ने ट्रेनिंग सेंटर की छवि को खराब करने के लिए एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) तकनीक(created fake images using AI (Artificial Intelligence) की मदद से फर्जी तस्वीरें बनाई और उन्हें सोशल मीडिया पर वायरल किया(subsequently circulated them on social media)।
जांच में यह भी पता चला कि रंगरूट मशीन से बनी रोटियों के बजाय पारंपरिक राजस्थानी व्यंजन जैसे गट्टे की सब्जी, केर-सांगरी की सब्जी और भट्टे की रोटियों की मांग कर रहे थे। एडीजीपी सिंह ने बताया कि राजस्थान पुलिस की दूरसंचार शाखा से जुड़े ये जवान मिलकर अपनी शरारतों और अनुशासनहीनता से ट्रेनिंग सेंटर में कई समस्याएं पैदा कर रहे थे। उनके व्यवहार को प्रशिक्षण के माहौल और अनुशासन के खिलाफ बताया गया।
राजस्थान पुलिस के DGP के अनुरोध पर कुल 1,005 रंगरूटों को नौ महीने के कांस्टेबल ट्रेनिंग कोर्स के लिए ट्रेनिंग सेंटर भेजा गया था। हालांकि, इन रंगरूटों का खाना बनाने में सहायता के लिए केवल दो रसोइयों को भेजा गया था और उनकी देखरेख के लिए किसी अधिकारी को स्थायी तौर पर तैनात नहीं किया गया था।
36 अनुशासनहीन रंगरूटों को PTC ने राजस्थान पुलिस के इंस्पेक्टर सतवीर यादव को सौंपा, जो गुरुवार को उन्हें उनके गृह राज्य लेकर गए। एडीजीपी ने बताया कि बाकी रंगरूटों की ट्रेनिंग बिना किसी व्यवधान के जारी रहेगी।
एडीजीपी सिंह ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई प्रशिक्षण के अनुशासन और माहौल को बनाए रखने के लिए आवश्यक थी। उन्होंने यह भी कहा कि रंगरूटों की गतिविधियों ने न केवल प्रशिक्षण प्रक्रिया को बाधित किया, बल्कि सेंटर की प्रतिष्ठा को भी प्रभावित किया।
इस मामले ने सोशल मीडिया पर भी हलचल मचा दी है, क्योंकि फर्जी तस्वीरों और पारंपरिक खाने की मांग के कारण यह घटना चर्चा का विषय बनी हुई है।
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