
नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट (Middle East) में जारी संघर्ष के बीच ग्लोबल क्रूड ऑयल मार्केट (Global Crude Oil Market) में भारी उछाल देखा जा रहा है। इजरायल (Israel) और ईरान (Iran) के बीच चल रही जंग अब गल्फ क्षेत्र की ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर पर केंद्रित हो गई है। इजरायल ने दुनिया की सबसे बड़ी ऑयल और नेचुरल गैस फील्ड पर हमला किया, जिससे ब्रेंट क्रूड 112 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गया।
क्रूड की कीमतों में तेजी जारी
ईरान-इजरायल जंग का चौथा हफ्ता शुरू हो गया है। शुरुआती गिरावट के बाद ब्रेंट क्रूड ने 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब बंद किया था, लेकिन अब इसमें और तेजी देखी जा रही है। एशियाई ट्रेडिंग में गुरुवार सुबह ब्रेंट क्रूड 112 डॉलर के उच्च स्तर पर पहुंच गया। अमेरिकी क्रूड (WTI) भी 3.5% बढ़कर 99 डॉलर प्रति बैरल के करीब है। अमेरिकी नेचुरल गैस में रातोंरात 5% की तेजी दर्ज की गई।
साउथ पार्स पर हमला और मिसाइल हिट
इजरायल ने ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड को निशाना बनाया। इसके जवाब में ईरान ने कतर की रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी पर मिसाइल दागी। एक मिसाइल ने सीधे लक्ष्य को टारगेट किया, जबकि चार मिसाइलों को रोक दिया गया। रास लाफान दुनिया की सबसे बड़ी LNG प्रोडक्शन साइट है, जो इस महीने से बंद पड़ी है।
साउथ पार्स का वैश्विक महत्व
साउथ पार्स ईरान की घरेलू गैस सप्लाई के साथ पड़ोसी देशों जैसे इराक और टर्की को भी गैस भेजता है। यह फील्ड दुनिया के सबसे बड़े नेचुरल गैस भंडार का लगभग एक-तिहाई हिस्सा है, जिसमें इतनी गैस है कि यह दुनिया की जरूरतों को 13 साल तक पूरा कर सकती है।
ट्रंप को पहले से थी जानकारी
वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को साउथ पार्स हमले की जानकारी पहले से थी। उन्होंने ईरान की ऊर्जा परिसंपत्तियों पर हमले के खिलाफ सख्त रुख अपनाया। इस बीच, संयुक्त अरब अमीरात ने हबशान गैस फैसिलिटी का संचालन अस्थायी रूप से बंद कर दिया है।
भारत पर असर
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए मिडिल ईस्ट पर भारी निर्भर है। देश का करीब 85-90% क्रूड ऑयल आयात मिडिल ईस्ट से आता है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जंग के कारण सप्लाई बाधित होने से तेल की कीमतें बढ़ रही हैं।
पेट्रोल-डीजल महंगा होने की संभावना
क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर पेट्रोल और डीजल पर पड़ेगा। ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स महंगे होने से आम सामान की कीमतों पर भी असर आएगा। घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतें भी बढ़ सकती हैं और स्टोरेज सीमित होने से शॉर्टेज का खतरा है। इन सबका असर सीधे महंगाई पर देखने को मिलेगा।
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