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बंगालः TMC के फ्रीज खातों पर घमासान… कोलकाता हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ SC जाएगा बागी गुट

July 10, 2026

कोलकाता। पश्चिम बंगाल (West Bengal) में तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress- TMC) के बैंक खातों के फ्रीज होने के बाद से सियासी घमासान तेज हो गया है। राज्य के नेता प्रतिपक्ष रितब्रत बनर्जी (Ritabrata Banerjee) ने गुरुवार को ऐलान किया है कि उनका गुट कोलकाता हाई कोर्ट (Calcutta High Court) के उस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) जाएगा, जिसमें टीएमसी को अपने तीन फ्रीज किए गए बैंक खातों को अस्थायी रूप से इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई थी। रितब्रत ने पार्टी फंड में करोड़ों रुपये की हेराफेरी का गंभीर आरोप लगाया है।

गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस के उन तीन बैंक खातों से ममता बनर्जी नीत गुट के रोजमर्रा के खर्चों का प्रबंधन करने के लिए एक विशेष अधिकारी नियुक्त किया, जिनसे वित्तीय लेन-देन पर रोक लगा दी गई थी। न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश सुब्रत तालुकदार को ममता खेमे के रोजमर्रा के खर्चों के प्रबंधन के लिए 30 सितंबर 2026 तक विशेष अधिकारी नियुक्त किया।


  • तृणमूल विधायक ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा के नेतृत्व वाले प्रतिद्वंद्वी गुट के नेताओं ने 18 जून को बिधाननगर पुलिस आयुक्तालय के साइबर अपराध थाने में एक शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि एक निजी बैंक में पार्टी के तीन खातों में जमा राशि अपराध से अर्जित रकम है। शिकायतकर्ताओं ने संबंधित पुलिस अधिकारियों से मामले में कार्रवाई करने का अनुरोध किया था। प्राथमिकी दर्ज होने के एक दिन बाद 19 जून को तीनों खातों को ‘डेबिट फ्रीज’ (किसी बैंक खाते से वित्तीय लेन-देन पर रोक) कर दिया गया था।

    न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने तीनों बैंक खातों के किन्हीं दो अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं को विशेष अधिकारी के समक्ष चेक पेश करने की अनुमति दी, जिसे पैसे निकालने के लिए बैंक अधिकारियों के पास भेजा जाएगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता को सिर्फ पार्टी के संचालन से जुड़े रोजमर्रा के खर्चों के लिए बैंक खाते से राशि निकालने की इजाजत होगी।

    ‘सुप्रीम कोर्ट में ईडी भी होगी मामले का हिस्सा’
    रितब्रत बनर्जी ने संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा, “हम इस मामले में एक स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दाखिल करने जा रहे हैं। हमने अपने वकीलों से सलाह ले ली है और अब हम सुप्रीम कोर्ट का रुख कर रहे हैं।”

    उन्होंने एक अहम तकनीकी पहलू पर जोर देते हुए बताया कि जब कोलकाता हाई कोर्ट में यह मामला मूल रूप से दायर किया गया था, तब प्रवर्तन निदेशालय (ED) इसमें शामिल नहीं था। लेकिन, अब जब सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल की जा रही है, तो ईडी भी इस पूरी कानूनी कार्यवाही का एक पक्ष बन जाएगी।

    160 करोड़ की हेराफेरी, ‘नया नटवरलाल’ कहकर कसा तंज
    नेता प्रतिपक्ष ने पार्टी फंड में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग का दावा किया है। रितब्रत का आरोप है कि एक कंपनी ने पार्टी के फंड का इस्तेमाल करके संपत्तियां खरीदीं और बाद में टीएमसी ने उसी कंपनी को उन संपत्तियों का किराया चुकाया।

    इस मामले पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा, “इस ‘नए नटवरलाल’ को बहुत-बहुत बधाई। असली नटवरलाल ने तो ताजमहल बेच दिया था; लेकिन यहां, एक कंपनी ने पार्टी के खजाने से 160 करोड़ रुपये का भुगतान कर संपत्तियां खरीदीं और फिर पार्टी ने उसी कंपनी को किराया भी दिया। यह साफ तौर पर मनी लॉन्ड्रिंग का ही एक मामला है।”

    टीएमसी का पलटवार: राजनीति से प्रेरित है कार्रवाई
    दूसरी ओर, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी ने ईडी द्वारा पार्टी के तीन बैंक खातों में जमा 440.42 करोड़ रुपये फ्रीज किए जाने के कदम की कड़ी निंदा की है। टीएमसी ने इसे राजनीति से प्रेरित फैसला करार दिया है। सत्ताधारी पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर विपक्ष को कमजोर करने के लिए जांच एजेंसियों का दुरुपयोग करने का सीधा आरोप लगाया है।

    पूर्व टीएमसी सांसदों के बीजेपी में जाने पर क्या बोले रितब्रत?
    हाल ही में टीएमसी के पूर्व राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव, प्रकाश चिक बड़ाईक और सुखेंदु शेखर रॉय ने राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया था। इसके कुछ हफ्ते बाद उन्होंने सॉल्ट लेक स्थित पार्टी कार्यालय में प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य की मौजूदगी में बीजेपी का दामन थाम लिया था।

    इन पूर्व नेताओं के दलबदल पर प्रतिक्रिया देते हुए रितब्रत बनर्जी ने साफ किया कि राजनीतिक विचारधारा अलग होने से उनके निजी रिश्तों पर कोई आंच नहीं आएगी। उन्होंने कहा, “सुखेंदु दा के साथ मेरा बहुत पुराना संबंध है; वे एक वरिष्ठ राजनेता हैं जिन्होंने कई मौकों पर मेरा मार्गदर्शन किया है। सुष्मिता मेरी दोस्त हैं; हम दोनों 2014 में एक साथ सांसद बने थे। प्रकाश मेरे लिए छोटे भाई की तरह हैं। अगर वे अपना कोई व्यक्तिगत फैसला लेते हैं, तो मेरा उस पर कोई अधिकार नहीं है। राजनीतिक विचार अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन निजी रिश्ते कायम रहते हैं। लोकतंत्र में उन्हें निश्चित रूप से ऐसा करने का पूरा अधिकार है।”

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