
नई दिल्ली। चांदी (Silver) अब सिर्फ आभूषण (Jewelry) या निवेश (Investment तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह उद्योग (Industry) और ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) की एक रणनीतिक धातु (Strategic Metals) बन चुकी है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के अनुसार, भारत को चांदी को ‘कीमती धातु’ के नजरिये से देखने के बजाय इसे एक अहम औद्योगिक और ऊर्जा-संबंधी इनपुट मानकर नीति बनानी चाहिए। इसके लिए भारत को दीर्घकालिक विदेशी खनन आपूर्ति सुनिश्चित करने, घरेलू स्तर पर रिफाइनिंग और रीसाइक्लिंग क्षमता बढ़ाने, तैयार चांदी के आयात पर निर्भरता कम करने और आयात स्रोतों में विविधता लाने पर फोकस करना होगा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक स्तर पर चांदी की प्रोसेसिंग में चीन का दबदबा है। चीन दुनिया भर से चांदी के अयस्क और कंसन्ट्रेट्स का बड़ा हिस्सा आयात कर उन्हें घरेलू स्तर पर रिफाइन करता है और फिर इलेक्ट्रॉनिक्स, मेडिकल डिवाइस और सोलर पैनल जैसे उच्च मूल्य वाले उत्पादों के रूप में निर्यात करता है। इसके विपरीत, भारत बड़ी मात्रा में रिफाइंड चांदी आयात करता है। 2024 में भारत ने करीब 6.4 अरब डॉलर की रिफाइंड चांदी आयात की, जिससे वह दुनिया का सबसे बड़ा तैयार चांदी का उपभोक्ता बन गया, न कि प्रोसेसर।
जीटीआरआई के संस्थापक के मुताबिक, भारत की आयात निर्भरता लगातार बढ़ रही है। वित्त वर्ष 2025 में जहां चांदी उत्पादों का निर्यात 478.4 मिलियन डॉलर रहा, वहीं आयात 4.83 अरब डॉलर तक पहुंच गया। साल 2025 में यह निर्भरता और तेज हुई। अक्तूबर में अकेले 2.7 अरब डॉलर का आयात दर्ज किया गया, जो साल-दर-साल आधार पर 529 प्रतिशत की छलांग है। जनवरी से नवंबर 2025 के बीच कुल आयात 8.5 अरब डॉलर रहा और पूरे साल के लिए इसके 9.2 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।
रिपोर्ट में चेताया गया है कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में चांदी की आपूर्ति सुरक्षा उतनी ही अहम होती जा रही है जितनी ऊर्जा सुरक्षा। खासतौर पर तब, जब चीन ने 1 जनवरी 2026 से चांदी के निर्यात को लाइसेंस-आधारित प्रणाली में डाल दिया है। अब केवल सरकारी मंजूरी प्राप्त कंपनियां ही चांदी का निर्यात कर सकेंगी। यह पूर्ण प्रतिबंध नहीं है, लेकिन इससे वैश्विक आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है और कीमतों में उतार-चढ़ाव तेज हुआ है।
जीटीआरआई का कहना है कि चांदी की रणनीतिक अहमियत तेजी से बढ़ रही है क्योंकि वैश्विक मांग का 55-60 प्रतिशत हिस्सा अब औद्योगिक उपयोग से आता है। इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पावर, इलेक्ट्रिक वाहन, रक्षा और चिकित्सा तकनीकों में चांदी की भूमिका लगातार बढ़ रही है। सोलर फोटोवोल्टिक सेल्स में चांदी एक महत्वपूर्ण कंडक्टिव सामग्री है और अकेले सोलर सेक्टर की हिस्सेदारी वैश्विक मांग में करीब 15 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जो आगे और बढ़ने की संभावना है।
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