इस्लामाबाद। गंभीर आर्थिक संकट (severe economic crisis) से जूझ रहे पाकिस्तान (Pakistan) ने आय के नए स्रोत तलाशते हुए एक अहम फैसला लिया है। देश की एकमात्र प्रमुख शराब निर्माता मरी ब्रुअरी (Murree Brewery) को लगभग पांच दशक बाद विदेशों में शराब निर्यात की अनुमति दे दी गई है।
1977 से लगा था प्रतिबंध
साल 1977 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो ने इस्लामिक समूहों के दबाव में देश में शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद मरी ब्रुअरी केवल गैर-मुस्लिम नागरिकों और विदेशी पर्यटकों को सीमित दायरे में ही उत्पाद बेच पाती थी।
अब किन देशों में होगा निर्यात?
नई अनुमति के तहत कंपनी अब ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन के सदस्य देशों को छोड़कर अन्य देशों—जैसे ब्रिटेन, जापान, पुर्तगाल और थाईलैंड—में शराब निर्यात कर सकती है। इससे पहले कंपनी केवल जूस, मिनरल वाटर और माल्ट जैसे गैर-मादक उत्पाद ही विदेश भेजती थी।
मरी ब्रुअरी की स्थापना 19वीं सदी में ब्रिटिश दौर में हुई थी, ताकि सैनिकों को बीयर उपलब्ध कराई जा सके। 1947 के बाद यह कंपनी एक पारसी परिवार के पास आ गई। वर्तमान में इसके मालिक इस्फनयार भंडारा हैं, जो लंबे समय से निर्यात की अनुमति के प्रयास में थे।
आर्थिक दबाव बना वजह
पाकिस्तान पर इस समय करीब 138 अरब डॉलर का कर्ज है, जबकि आय और खर्च के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है। हर साल बड़ी रकम ब्याज चुकाने में खर्च हो रही है। ऐसे में सरकार के लिए नए राजस्व स्रोत तलाशना मजबूरी बन गया है, और शराब निर्यात को उसी दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है।
बैन की पृष्ठभूमि
1977 के चुनावों के बाद भुट्टो सरकार पर धांधली और पश्चिमी प्रभाव बढ़ाने के आरोप लगे थे। विरोध को शांत करने के लिए शराब पर प्रतिबंध लगाया गया। उसी साल जनरल जिया-उल-हक ने तख्तापलट कर सत्ता संभाली और इस्लामीकरण की नीतियों को आगे बढ़ाया, जिससे यह प्रतिबंध लंबे समय तक जारी रहा।
आर्थिक दबाव के बीच पाकिस्तान का यह फैसला नीतिगत बदलाव का संकेत है। हालांकि, यह कदम केवल निर्यात तक सीमित है, लेकिन इससे देश की आर्थिक रणनीति में व्यावहारिकता की झलक साफ दिखाई देती है।
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