
तिरुवनंतपुरम । केरल की चथन्नूर विधानसभा सीट जीत कर (By winning Chathannur assembly seat in Kerala) भाजपा ने पांच साल बाद वापसी की (BJP makes comeback after Five Years) । पूर्व कांग्रेस नेता बी.बी. गोपाकुमार ने सीपीआई के आर. राजेंद्रन को 4,002 वोटों से हराकर यह जीत हासिल की।
यह परिणाम ऐसे राज्य में भाजपा के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, जहां लंबे समय से माकपा के नेतृत्व वाला एलडीएफ और कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ हावी रहे हैं। गोपाकुमार ने जीत के बाद इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को समर्पित करते हुए कहा कि यह पार्टी कार्यकर्ताओं की मेहनत का नतीजा है। उन्होंने कहा, “जैसा प्रधानमंत्री कहते हैं कि वे एक साधारण कार्यकर्ता हैं, वैसे ही मैं भी जनता के बीच एक कार्यकर्ता के रूप में काम करता रहूंगा।” यह जीत सिर्फ आंकड़ों के लिहाज से ही नहीं, बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी अहम मानी जा रही है। चथन्नूर सीट पर भाजपा पिछले दो चुनावों में दूसरे स्थान पर रही थी, लेकिन इस बार उसने रणनीतिक बढ़त हासिल की।
गोपाकुमार का कांग्रेस से भाजपा में आना भी इस जीत में अहम कारक माना जा रहा है। इससे न सिर्फ एंटी-इंकम्बेंसी वोट एकजुट हुए, बल्कि यूडीएफ के पारंपरिक वोट बैंक में भी सेंध लगी। इस मुकाबले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता थोप्पिल रवि के बेटे सूरज रवि तीसरे स्थान पर रहे, जिससे विपक्षी वोटों का बिखराव साफ दिखा और इसका फायदा भाजपा को मिला। तिरुवनंतपुरम स्थित भाजपा मुख्यालय में चथन्नूर की जीत की पुष्टि होते ही जश्न का माहौल बन गया।
वहीं नेमोम सीट पर भी कड़ा मुकाबला देखने को मिला, जहां भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर करीब 2,000 वोटों की बढ़त के साथ आगे चल रहे थे। नेमोम सीट का खास महत्व है, क्योंकि 2016 में यहीं से भाजपा ने पहली बार केरल विधानसभा में खाता खोला था, जब ओ. राजगोपाल ने जीत दर्ज की थी। हालांकि, 2021 में पार्टी यह सीट गंवा बैठी थी। कुल मिलाकर चथन्नूर की जीत और नेमोम में मजबूत प्रदर्शन यह संकेत देते हैं कि केरल में भाजपा संगठनात्मक स्तर पर नई रणनीति के साथ अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। हालांकि, यह देखना बाकी है कि पार्टी इस बढ़त को कितनी दूर तक कायम रख पाती है।
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