
रांची । छात्र नेता रवींद्र पासवान (Student leader Ravindra Paswan) ने कहा कि हमारा आंदोलन (Our Movement) भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर है (Is for Transparency in Recruitment Process and Fair Investigation) ।
झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के खिलाफ रांची में चल रहा छात्र आंदोलन मंगलवार को 19वें दिन भी जारी रहा । सोमवार को विधानसभा घेराव के दौरान हुए लाठीचार्ज और पुलिस कार्रवाई के बाद छात्र देर रात से जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में फिर से इकट्ठा हो गए। आंदोलनकारियों ने अब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को रांची बुलाने की मांग तेज कर दी है।
जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच के रवींद्र पासवान ने कहा, ‘राहुल गांधी रांची आकर देखें कि न्याय मांग रहे छात्रों के साथ उनकी पार्टी के समर्थन से चल रही सरकार क्या सलूक कर रही है।’ उन्होंने कहा कि छात्रों का आंदोलन किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर है। आंदोलनकारी रोहित कुमार सिंह ने कहा कि राहुल गांधी को रांची आना होगा। उन्होंने अपनी पीठ पर लाठी के निशान दिखाते हुए कहा, ‘राहुल गांधी खुद आकर देखें कि विधानसभा के पास लाइट बुझाने के बाद छात्रों को किस तरह पीटा गया। यहां तक कि लड़कियों पर पुरुष पुलिसकर्मियों ने लाठी बरसाई।’
छात्रों ने कहा कि राहुल गांधी ने सोमवार को पुलिस बल के इस्तेमाल की निंदा करते हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार की बात कही थी। ऐसे में अब उन्हें आंदोलन स्थल पर पहुंचकर छात्रों की बात सुननी चाहिए। उल्लेखनीय है कि सोमवार को हजारों छात्र जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से विधानसभा घेराव के लिए निकले थे। प्रदर्शनकारियों ने कई बैरिकेड पार किए और विधानसभा के करीब तक पहुंच गए। उन्हें रोकने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन, आंसू गैस और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया। इस दौरान 100 से अधिक छात्र घायल हुए हैं या उन्हें चोट आई है।
आंदोलनकारी अब मुख्य रूप से जेएसएससी-सीजीएल विवादित परीक्षा को रद्द करने और परीक्षाओं में अनियमितताओं की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग कर रहे हैं। इस बीच आंदोलन को लेकर राजनीतिक टकराव भी तेज हो गया है। भाजपा ने पुलिस कार्रवाई के विरोध में मंगलवार को राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया है। वहीं राज्य सरकार का कहना है कि छात्रों की कई मांगों पर कार्रवाई की जा चुकी है और बातचीत के जरिए समाधान का रास्ता खुला है।
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