कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली 25 हस्तियों को राज्य के नागरिक सम्मानों (State civilian honours) से नवाजा। कोलकाता के देशप्रिय पार्क में आयोजित समारोह में कला, संस्कृति, साहित्य और लोकसेवा से जुड़े लोगों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने सभी सम्मानित व्यक्तियों को प्रशस्ति-पत्र और स्मृति चिह्न प्रदान करते हुए उनके योगदान की सराहना की।
BJP सांसद नगेन रॉय को ‘बंग विभूषण’, सियासी चर्चा तेज
इस बार सबसे ज्यादा चर्चा जिस नाम को लेकर हुई, वह हैं नगेन रॉय, जिन्हें अनंता महाराज के नाम से भी जाना जाता है।
वे भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राज्यसभा सांसद हैं।
उन्हें राज्य का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘बंग विभूषण’ प्रदान किया गया। सम्मान ममता बनर्जी ने स्वयं मंच पर देकर उन्हें अंगवस्त्र और प्रशस्ति-पत्र भेंट किया। यह फैसला ऐसे समय आया है जब राज्य में अप्रैल–मई के दौरान संभावित विधानसभा चुनावों की तैयारियां तेज हैं।
ऐसे में यह सम्मान उस सामाजिक आधार तक पहुंच बनाने की रणनीति माना जा रहा है, जो चुनावी समीकरणों में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
ममता बनर्जी ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री ने कहा कि नगेन रॉय को यह सम्मान राजबंशी भाषा और संस्कृति के संरक्षण में उनके योगदान के लिए दिया गया है और उम्मीद जताई कि वे समाज के लिए आगे भी काम करते रहेंगे।
नगेन रॉय की प्रतिक्रिया
सम्मान मिलने पर नगेन रॉय ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि उन्होंने इसकी कल्पना नहीं की थी।
दल बदल की अटकलों को खारिज करते हुए उन्होंने साफ किया कि किसी पार्टी में शामिल होने की उनकी कोई योजना नहीं है।
उन्होंने कहा कि राजनीति से ज्यादा उनका ध्यान समुदाय और सांस्कृतिक मुद्दों पर रहा है।
उत्तर बंगाल की राजनीति में अहम चेहरा
नगेन रॉय लंबे समय से ‘ग्रेटर कूच बिहार’ राज्य की मांग से जुड़े रहे हैं और राजबंशी समुदाय में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। विश्लेषकों का मानना है कि इस समुदाय का वोट रुझान कई सीटों पर परिणाम प्रभावित कर सकता है।
पहले TMC के करीब, फिर BJP से जुड़े
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा रही है कि नगेन रॉय पहले तृणमूल कांग्रेस के करीब माने जाते थे, लेकिन बाद में BJP के साथ जुड़े। हाल के दिनों में उन्होंने मतदाता सूची पुनरीक्षण जैसे मुद्दों पर भी खुलकर अपनी राय रखी थी।
अन्य हस्तियों को भी मिला सम्मान
समारोह में कई सांस्कृतिक और कलात्मक हस्तियों को भी सम्मानित किया गया, जिनमें चित्रकार गणेश हलुई, गायक शिवाजी चट्टोपाध्याय और अन्य कला-जगत से जुड़े नाम शामिल रहे।
चुनावी रणनीति या सांस्कृतिक पहल?
राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, चुनाव से ठीक पहले दिया गया यह सम्मान
सांस्कृतिक मान्यता के साथ-साथ
उत्तर बंगाल में सामाजिक संतुलन साधने
और विपक्ष के प्रभाव वाले वर्गों तक संदेश पहुंचाने की कोशिश भी हो सकता है। यानी, यह कदम सम्मान से ज्यादा राजनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
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