
भागलपुर: बिहार के भागलपुर जिले में गंगा नदी पर विक्रमशिला सेतु के ठीक बगल में बन रहे समानांतर 4-लेन पुल (Parallel Bridge) का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है, लेकिन हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार इसमें कुछ गंभीर तकनीकी चुनौतियां सामने आई हैं. नदी के बीच में बने तीन पिलरों में झुकाव (Tilting या Leaning) की समस्या आई है. ये पिलर अभी पूरी तरह से सीधे नहीं बन पाए हैं, और बाढ़ के दौरान गंगा की तेज धारा के दबाव से इन्हें और अधिक झुकने का खतरा जताया जा रहा है. तकनीकी रूप से यह एक गंभीर संकेत माना जा रहा है, क्योंकि नदी के बीच बने ये पिलर अभी पूरी तरह संतुलित नहीं हो पाए हैं. खबरों के अनुसार, इन तीन पिलरों पर सब-स्ट्रक्चर (जैसे पियर और कैंटिलीवर) का काम रोक दिया गया है, जबकि अन्य पिलरों पर निर्माण जारी है.
जानकारी यह है कि ये पिलर पानी की सतह से करीब 10-15 फीट ऊपर बने हुए हैं. एक पिलर को सीधा करने के लिए कंक्रीट के भारी बोल्डर रखे गए हैं, ताकि धीरे-धीरे वह समतल हो सके. इंजीनियरों ने इसे तकनीकी गड़बड़ी बताया है, लेकिन आशंका है कि मॉनसून के समय में या फिर बाढ़ आने से ये पिलर डूब जाएंगे, जिससे रिपेयरिंग कार्य में और देरी हो सकती है. बता दें कि पुल का पूर्ण निर्माण मई 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है, लेकिन इस समस्या से विलंब की संभावना बढ़ गई है.
बता दें कि यह पुल विक्रमशिला सेतु के बोझ को कम करने के लिए बनाया जा रहा है, जो पहले से ही जर्जर हो चुका है. हाल में उसके कुछ प्रोटेक्शन वॉल (False Walls) भी क्षतिग्रस्त ढह गए हैं, जिससे पुराने पुल की सुरक्षा पर अलग से सवाल उठ रहे हैं. अधिकारियों का कहना है कि इसे ठीक किया जा रहा है, लेकिन क्षेत्र में पुरानी घटनाओं (जैसे अगुवानी सेतु के ध्वस्त होने) के कारण लोग चिंतित हैं.
बिहार में हाल के वर्षों में कई पुलों के गिरने या क्षतिग्रस्त होने की घटनाएं सामने आई हैं. खासकर अगुवानी घाट सुल्तानगंज पुल (Aguwani Sultanganj Bridge) के बार-बार ध्वस्त होने की घटना ने निर्माण गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए थे. ऐसे में भागलपुर में नए पुल के पिलरों में झुकाव की खबर ने एक बार फिर लोगों की चिंता बढ़ा दी है.
दरअसल, बन रहे इस नए पुल का उद्देश्य क्षेत्र की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना है, लेकिन शुरुआती चरण में ही सामने आई तकनीकी समस्याएं चिंता का कारण बन गई हैं. लगातार सामने आ रही पुल संबंधी घटनाओं के बीच यह जरूरी हो गया है कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता, तकनीकी जांच और निगरानी को और सख्त किया जाए, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे से बचा जा सके.
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