नई दिल्ली। कनाडा (Canada) ने 26/11 मुंबई आतंकी हमले के आरोपी तहव्वुर हुसैन राणा (Tahawwur Hussain Rana) की नागरिकता रद्द करने की आधिकारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह फैसला कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी (Mark Carney) के प्रस्तावित भारत दौरे से ठीक पहले लिया गया है, जिसे दोनों देशों के संबंध सुधारने की दिशा में अहम संकेत माना जा रहा है।
रिश्तों में सुधार की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा कदम
विश्लेषकों का मानना है कि यह निर्णय पूर्व प्रधानमंत्री Justin Trudeau के कार्यकाल में तनावपूर्ण रहे भारत-कनाडा संबंधों को पटरी पर लाने की कोशिश का हिस्सा हो सकता है। नई दिल्ली और ओटावा के बीच पिछले महीनों में कूटनीतिक खटास चर्चा का विषय रही थी।
26/11 हमले से जुड़ा है मामला
पाकिस्तान में जन्मा 65 वर्षीय राणा भारत में 2008 के 2008 Mumbai attacks से जुड़े आरोपों का सामना कर रहा है। इस हमले को पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन Lashkar-e-Taiba ने अंजाम दिया था, जिसमें 160 से अधिक लोगों की मौत हुई थी।
राणा को अमेरिका से प्रत्यर्पित किए जाने के बाद National Investigation Agency ने औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया। उसे विशेष विमान से भारत लाने की कार्रवाई में National Security Guard के अधिकारी भी शामिल थे।
आतंकवाद नहीं, ‘गलत जानकारी’ बना आधार
दिलचस्प बात यह है कि कनाडा सरकार ने नागरिकता रद्द करने की प्रक्रिया आतंकवाद के आरोपों पर नहीं, बल्कि आव्रजन प्रक्रिया में कथित गलत बयानी के आधार पर शुरू की है।
कनाडा के आव्रजन विभाग Immigration, Refugees and Citizenship Canada (IRCC) के अनुसार, राणा ने नागरिकता आवेदन के दौरान अपने निवास संबंधी तथ्य गलत बताए थे।
जांच में सामने आया झूठा निवास दावा
राणा ने दावा किया था कि वह आवेदन से पहले कई वर्षों तक कनाडा में रह रहा था और बहुत कम समय के लिए ही बाहर गया। लेकिन Royal Canadian Mounted Police की जांच में पाया गया कि वह वास्तव में अमेरिका में अधिक समय बिता रहा था और वहां कारोबार चला रहा था।
अधिकारियों ने इसे “जानबूझकर किया गया भ्रामक प्रस्तुतिकरण” बताया है, जिससे नागरिकता देने वाले अधिकारियों को गलत निष्कर्ष पर पहुंचना पड़ा।
मामला अब फेडरल कोर्ट में
सरकार ने नागरिकता निरस्तीकरण की प्रक्रिया को अंतिम निर्णय के लिए Federal Court of Canada को भेज दिया है, जिसके पास यह तय करने का अधिकार है कि नागरिकता धोखाधड़ी या तथ्यों को छिपाकर हासिल की गई थी या नहीं।
बचाव पक्ष ने किया विरोध
राणा के वकील ने इस कार्रवाई को अनुचित बताते हुए अदालत में चुनौती दी है और इसे अधिकारों का उल्लंघन बताया है। हालिया सुनवाई में सरकारी पक्ष ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी कुछ संवेदनशील जानकारियों को सार्वजनिक न करने की अनुमति भी मांगी।
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