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शराबी किरदारों से बनाई अलग पहचान, लेकिन असल जिंदगी में रहे संयमित; संघर्ष और प्रतिभा से चमके केष्टो मुखर्जी

June 16, 2026


नई दिल्ली ।भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ कलाकार ऐसे रहे हैं जिन्होंने मुख्य अभिनेता न होते हुए भी अपनी अलग पहचान बनाई और दर्शकों के मन में स्थायी जगह हासिल की। ऐसे ही कलाकारों में केष्टो मुखर्जी (Keshto Mukherjee) का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। हिंदी फिल्मों (Hindi Films) में शराबी किरदारों (Drunkard Roles) को अपने विशिष्ट अंदाज में निभाने वाले केष्टो मुखर्जी ने दशकों तक दर्शकों का मनोरंजन किया। दिलचस्प बात यह थी कि पर्दे पर अक्सर नशे में दिखाई देने वाले इस अभिनेता का निजी जीवन (Personal Life) इससे बिल्कुल अलग था और वे वास्तविक जीवन में शराब से दूर रहते थे।

कोलकाता में जन्मे केष्टो मुखर्जी ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत रंगमंच और नुक्कड़ नाटकों से की थी। अभिनय के प्रति उनके समर्पण और प्रतिभा ने जल्द ही फिल्म जगत का ध्यान आकर्षित किया। प्रसिद्ध फिल्मकार ऋत्विक घटक ने उनकी क्षमता को पहचाना और उन्हें अपनी बांग्ला फिल्म ‘नागरिक’ में अवसर दिया। हालांकि यह फिल्म बनने के कई वर्षों बाद प्रदर्शित हो सकी, लेकिन इसने केष्टो मुखर्जी के अभिनय सफर की महत्वपूर्ण शुरुआत की।

बंगाली फिल्मों में काम करने के बावजूद आर्थिक चुनौतियां उनके सामने बनी रहीं। बेहतर अवसरों और बड़े मंच की तलाश में उन्होंने मुंबई का रुख किया। उस दौर में फिल्म उद्योग में जगह बनाना बेहद कठिन माना जाता था, लेकिन केष्टो मुखर्जी ने संघर्ष से पीछे हटने के बजाय लगातार प्रयास जारी रखे। मुंबई पहुंचने के बाद उन्हें ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्म ‘मुसाफिर’ में एक छोटी भूमिका मिली, जिसने उनके करियर को नई दिशा दी।

उनके संघर्ष के दिनों से जुड़ा एक रोचक प्रसंग आज भी चर्चा में रहता है। बताया जाता है कि एक बार वे प्रसिद्ध फिल्मकार बिमल रॉय से मिलने पहुंचे और काम की उम्मीद में लंबे समय तक उनका इंतजार करते रहे। जब बिमल रॉय ने उन्हें बताया कि फिलहाल कोई भूमिका उपलब्ध नहीं है, तब भी वे वहां से नहीं गए। कुछ समय बाद बिमल रॉय ने उनसे पूछा कि क्या वे कुत्ते की आवाज निकाल सकते हैं। केष्टो मुखर्जी ने बिना किसी झिझक के यह कर दिखाया। उनकी प्रतिभा और आत्मविश्वास से प्रभावित होकर बिमल रॉय ने उन्हें अपनी फिल्म में काम करने का अवसर दे दिया। यह घटना उनके धैर्य और समर्पण का प्रतीक मानी जाती है।

इसके बाद केष्टो मुखर्जी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने हिंदी सिनेमा की 90 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया और अपने विशेष अंदाज के कारण दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हुए। शराबी किरदारों की उनकी प्रस्तुति इतनी प्रभावशाली थी कि वह उनकी पहचान बन गई। उनकी कॉमिक टाइमिंग, चेहरे के भाव और सहज अभिनय ने उन्हें चरित्र अभिनेताओं की श्रेणी में विशिष्ट स्थान दिलाया। छोटे-छोटे किरदारों में भी वे दर्शकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने में सफल रहते थे।

सफलता के शिखर तक पहुंचने वाले इस कलाकार का जीवन हालांकि दुखद मोड़ पर समाप्त हुआ। बताया जाता है कि मुंबई के निकट एक गणपति मंदिर में दर्शन के लिए जाते समय उनकी कार को पीछे से एक ट्रक ने टक्कर मार दी। इस दुर्घटना में वे गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई और अगले दिन उन्हें हृदयाघात आया, जिससे उनका निधन हो गया। मात्र 56 वर्ष की आयु में उनका जाना फिल्म जगत के लिए बड़ी क्षति माना गया।


  • आज भी केष्टो मुखर्जी को हिंदी सिनेमा के उन कलाकारों में गिना जाता है जिन्होंने सीमित भूमिकाओं के बावजूद अपनी विशिष्ट शैली, हास्य प्रतिभा और यादगार अभिनय के बल पर दर्शकों के दिलों में अमिट छाप छोड़ी। उनका संघर्ष, समर्पण और सफलता की कहानी आने वाली पीढ़ियों के कलाकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है।

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