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भोलेनाथ को प्रसन्न करने का सरल उपाय, सावन में रोज शिवलिंग पर अर्पित करें यह पवित्र वस्तु

August 01, 2026

नई दिल्ली। सावन का पवित्र महीना (month of Sawan)भगवान शिव (Lord Shiva)की भक्ति और आराधना(worship) के लिए सबसे शुभ समय माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं(religious beliefs) के अनुसार इस पूरे महीने में श्रद्धा और नियमपूर्वक महादेव की पूजा करने से जीवन की अनेक बाधाएं दूर हो सकती हैं और सुख समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। इस वर्ष सावन 30 जुलाई से 28 अगस्त तक रहेगा और इस दौरान देशभर के शिवालयों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। मान्यता है कि सावन के महीने में भगवान शिव अपने भक्तों की सच्ची श्रद्धा और भक्ति से शीघ्र प्रसन्न होकर मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

पौराणिक कथाओं के अनुसार समुद्र मंथन के समय निकले हलाहल विष का पान भगवान शिव ने संपूर्ण सृष्टि की रक्षा के लिए किया था। विष की तीव्रता को शांत करने के लिए देवताओं ने उन पर जल अर्पित किया था। तभी से सावन में शिवलिंग पर जल चढ़ाने की परंपरा चली आ रही है। धार्मिक मान्यता है कि शिवलिंग पर जल अर्पित करने से मन को शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

सावन के प्रत्येक सोमवार का व्रत अत्यंत शुभ माना जाता है। यदि किसी कारणवश व्रत रखना संभव न हो तो प्रतिदिन भगवान शिव के मंदिर जाकर शिवलिंग पर एक लोटा स्वच्छ जल और बेलपत्र अवश्य अर्पित करना चाहिए। बेलपत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना गया है। मान्यता है कि श्रद्धा और आस्था के साथ बेलपत्र अर्पित करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्त की मनोकामनाएं पूरी करते हैं। यदि जल के स्थान पर दूध से अभिषेक करना चाहें तो किया जा सकता है लेकिन धार्मिक मान्यता के अनुसार दूध चढ़ाने के लिए तांबे के पात्र का उपयोग नहीं करना चाहिए।

जल या दूध अर्पित करने के बाद शिव पंचाक्षर मंत्र अथवा ओम नमः शिवाय मंत्र का जप करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इससे मन एकाग्र होता है और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है। इसके अलावा सावन में भगवान शिव का चंदन दही शहद घी और पंचामृत से अभिषेक करने की भी परंपरा है। धतूरा भांग आक के फूल और भस्म भी भगवान शिव को अर्पित किए जाते हैं जिन्हें उनकी प्रिय सामग्री माना गया है।

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार सावन का महीना चातुर्मास के अंतर्गत आता है और इस अवधि में भगवान शिव की विशेष आराधना का महत्व बढ़ जाता है। जिन लोगों के विवाह में बाधा आ रही हो स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हों आयु को लेकर चिंता हो या कुंडली में ग्रह दोष हों उन्हें विशेष रूप से इस महीने शिव पूजा करने की सलाह दी जाती है। कई लोग इस दौरान महामृत्युंजय मंत्र का जाप और रुद्राभिषेक भी कराते हैं।


  • सावन में पूजा के साथ साथ सात्विक जीवनशैली अपनाने पर भी विशेष जोर दिया जाता है। इस दौरान तामसिक भोजन से बचने और शुद्ध सात्विक आहार ग्रहण करने की सलाह दी जाती है। पत्तेदार सब्जियों का सेवन सीमित रखने और भोजन को अच्छी तरह पकाकर खाने की परंपरा भी बताई जाती है। नियमित रूप से गुनगुना पानी पीना और स्वच्छता का ध्यान रखना भी स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सच्ची श्रद्धा सादगी और भक्ति के साथ की गई शिव आराधना सबसे अधिक फलदायी मानी जाती है। इसलिए सावन के इस पावन महीने में यदि नियमित रूप से भगवान शिव का स्मरण किया जाए और शिवलिंग पर जल तथा बेलपत्र अर्पित किए जाएं तो जीवन में सकारात्मक बदलाव आने की मान्यता है। हालांकि यह सभी बातें धार्मिक आस्था और परंपराओं पर आधारित हैं और इन्हें श्रद्धा के भाव से ही देखा जाना चाहिए।

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