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पेंटागन-OpenAI समझौते पर अमेरिका में बवाल, ChatGPT अनइंस्टॉल में उछाल; Sam Altman ने दी सफाई

March 03, 2026

वॉशिंगटन। OpenAI और United States Department of Defense (पेंटागन) के बीच हुए समझौते ने अमेरिका में नई बहस छेड़ दी है। खबर सामने आते ही सोशल मीडिया पर विरोध तेज हुआ और बड़ी संख्या में यूजर्स ने ChatGPT ऐप हटाना शुरू कर दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक एक ही दिन में अनइंस्टॉल में करीब 295% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।



  • डील में क्या बदलाव बताए गए?
    OpenAI के CEO Sam Altman ने लंबी पोस्ट जारी कर स्पष्ट किया कि रक्षा विभाग के साथ एग्रीमेंट में खास शर्तें जोड़ी गई हैं, ताकि कंपनी के AI सिस्टम का इस्तेमाल अमेरिकी नागरिकों की निगरानी के लिए न हो।

    Altman के मुताबिक:
    AI का उपयोग जानबूझकर डोमेस्टिक सर्विलांस के लिए नहीं किया जाएगा।

    सभी काम अमेरिकी संविधान, Fourth Amendment और FISA जैसे कानूनों के दायरे में होंगे।

    यदि कोई असंवैधानिक आदेश दिया जाता है तो कंपनी उसका पालन नहीं करेगी।

    उन्होंने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया सर्वोपरि है और दुनिया की दिशा तय करना किसी निजी कंपनी का काम नहीं होना चाहिए।

    विवाद क्यों भड़का?

    जैसे ही Pentagon के साथ साझेदारी की खबर फैली, सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगे कि क्या AI तकनीक अब युद्ध और रक्षा अभियानों का हिस्सा बनने जा रही है। कुछ यूजर्स का तर्क है कि AI कंपनियों को सैन्य संस्थानों से दूरी रखनी चाहिए, जबकि समर्थक कहते हैं कि यदि तकनीक का उपयोग होना ही है तो उसे नियंत्रित और पारदर्शी ढंग से सरकार के साथ मिलकर किया जाना बेहतर है।

    Anthropic का जिक्र क्यों?

    इस बहस में AI कंपनी Anthropic का नाम भी सामने आया। रिपोर्ट्स के अनुसार, Anthropic ने रक्षा विभाग के साथ कुछ शर्तों पर असहमति जताई थी और साफ किया था कि उसकी तकनीक का इस्तेमाल मास सर्विलांस या ऑटोनोमस हथियारों में नहीं होना चाहिए। इसके बाद OpenAI की आगे बढ़ी डील ने चर्चा को और तीखा कर दिया।

    NSA और अन्य एजेंसियों पर क्या स्थिति?

    Altman ने स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में किसी एजेंसी, जैसे National Security Agency (NSA), को OpenAI की सेवाएं चाहिए होंगी, तो उसके लिए अलग से कॉन्ट्रैक्ट मॉडिफिकेशन करना होगा। मौजूदा एग्रीमेंट स्वतः सभी एजेंसियों को एक्सेस नहीं देता।

    कम्युनिकेशन पर भी स्वीकारोक्ति

    Altman ने माना कि डील को लेकर सार्वजनिक संवाद बेहतर हो सकता था। उनके अनुसार, यह जटिल और संवेदनशील मुद्दा है, जिसमें तकनीक की सीमाएं और सुरक्षा से जुड़े जोखिम दोनों शामिल हैं। कंपनी आने वाले समय में अतिरिक्त सेफगार्ड और सुरक्षा उपायों पर सरकार के साथ काम करेगी।

    बहस का केंद्र क्या है?

    मामला सिर्फ एक कॉन्ट्रैक्ट का नहीं, बल्कि AI पर नियंत्रण और जवाबदेही का है। सवाल उठ रहा है—AI का नियंत्रण सरकार के पास होगा, निजी कंपनियों के पास या लोकतांत्रिक निगरानी तंत्र के तहत? वैश्विक स्तर पर बढ़ते साइबर हमलों, ड्रोन टेक्नोलॉजी और डेटा इंटेलिजेंस के दौर में यह साझेदारी राष्ट्रीय सुरक्षा बनाम नागरिक स्वतंत्रता की बहस को और गहरा कर रही है।

    Pentagon और OpenAI की यह डील अब तकनीकी सहयोग से आगे बढ़कर AI के भविष्य की दिशा तय करने वाली चर्चा बन गई है।

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