नई दिल्ली। कोरोना संक्रमण (corona infection) महामारी के बीच लोक आस्था का महापर्व छठ (Mahaparv Chhath) व्रत हर्सोल्लास के साथ आज यानि गुरुवार को सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ समापन हो गया। उदयीमान भगवान भास्कर को छठ व्रतियों ने सुबह का अर्घ्य दिया। इस दौरान शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के सभी घाटों पर चार बजे सुबह से ही छठ व्रतियों तथा स्थानीय श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा।
वहीं दूसरी तरफ कई लोगों के मन में यह प्रश्न उठता है कि छट पर्व के दौरान महिलाएं नाक पर लंबा सिंदूर क्यों लगाती है, हालांकि इसकी कई पौराणिक कथाएं हैं। उनमें से एक है कि सिंदूर (Sindoor) भरने को सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। छठ पूजा में भी महिलाएं सिंदूर लगाती हैं। कहा जाता है कि विवाहित महिलाओं को सिंदूर लंबा और ऐसा लगाना चाहिए जो सभी को दिखे। ये सिंदूर माथे से शुरू होकर जितनी लंबी मांग हो, वहां तक लगाना चाहिए जो इस महिलाएं छट पर्व के दौरान लगाती हैं।
दूसरी तरफ छठ पूजा में संतान के अलावा सुहाग की लंबी उम्र की भी कामना की जाती है। अपने सुहाग और संतान की मंगल कामना के लिए महिलाएं 36 घंटों का निर्जला व्रत रखती हैं। लोक आस्था का महापर्व छठ व्रत हर्सोल्लास के साथ आज यानि गुरुवार को सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ समापन हो गया।
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