
नई दिल्ली। भारत (India) में इलेक्ट्रिक वाहनों (Electric Vehicles) की कीमतों (Price) में आने वाले समय में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इसकी वजह चीन (China) द्वारा लिया गया एक नीतिगत फैसला है, जिसने भारतीय ईवी उद्योग की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह फैसला ऐसे समय आया है जब पहले ही इलेक्ट्रिक वाहनों को मिलने वाला टैक्स लाभ पेट्रोल-डीजल गाड़ियों की तुलना में धीरे-धीरे कम होता जा रहा है।
चीन ने लिथियम-आयन बैटरियों के निर्यात पर मिलने वाली टैक्स रिबेट को 9 प्रतिशत से घटाकर 6 प्रतिशत करने का एलान किया है। यह बदलाव 1 अप्रैल से लागू होगा। इसके साथ ही चीन अगले एक साल के भीतर इस प्रोत्साहन को पूरी तरह खत्म करने की योजना भी बना रहा है। यह फैसला 8 जनवरी को लिया गया था।
भारत की कई इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता कंपनियां बैटरियों के लिए चीन पर काफी हद तक निर्भर हैं। BYD और CATL जैसी चीनी कंपनियां भारतीय बाजार के लिए प्रमुख आपूर्तिकर्ता हैं। ऐसे में टैक्स रिबेट घटने और पिछले एक साल में लिथियम की कीमतों में तेज उछाल के कारण बैटरी लागत बढ़ने की आशंका है।
एक इलेक्ट्रिक वाहन की कुल लागत में बैटरी की हिस्सेदारी एक-तिहाई से भी ज्यादा होती है। अगर बैटरी महंगी होती है, तो इसका सीधा असर वाहन निर्माताओं के मुनाफे पर पड़ेगा। ऐसे में कंपनियों के सामने दो ही विकल्प होंगे। या तो मुनाफा कम करें या बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर डालें।
रिपोर्ट के अनुसार, वे कंपनियां ज्यादा प्रभावित होंगी जो शॉर्ट-टर्म बैटरी सप्लाई एग्रीमेंट पर निर्भर हैं। इन कंपनियों के लिए लागत बढ़ने का असर जल्दी और ज्यादा महसूस किया जा सकता है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, एक कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी का मानना है कि, इस फैसले का असर अगले दो हफ्तों में बाजार में दिख सकता है। टैक्स रिबेट घटने से पहले कंपनियां तेजी से बैटरियों का स्टॉक जुटाने की कोशिश कर सकती हैं। जिससे सप्लाई चेन पर भी दबाव बढ़ने की संभावना है।
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