नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of India) ने सड़कों, पुलों और बिजली के तारों समेत सार्वजनिक ढांचे के रखरखाव को लेकर व्यापक दिशा-निर्देश जारी करने की मांग वाली एक याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश Surya Kant ने याचिका पर नाराज़गी जताते हुए कहा कि क्या सुप्रीम कोर्ट ही पूरा देश चलाए।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति Joymalya Bagchi की पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह याचिका किसी “शॉपिंग मॉल” की तरह है, जिसमें हर तरह की मांग जोड़ दी गई है। अदालत ने कहा कि इसमें सड़क के गड्ढों से लेकर पुलिस भवन, पुलों और अधूरे अंडरपास तक हर मुद्दा शामिल कर दिया गया है।
पीठ ने कहा कि इस तरह की याचिकाओं में इतने व्यापक मुद्दे शामिल कर दिए जाते हैं कि उन पर प्रभावी निर्देश जारी करना लगभग असंभव हो जाता है। अदालत ने साफ कहा कि सुप्रीम कोर्ट हर प्रशासनिक समस्या का समाधान करने वाला मंच नहीं है।
हालांकि अदालत ने याचिकाकर्ता को सलाह दी कि वह अपनी याचिका को ठीक से तैयार कर संबंधित हाईकोर्ट में दायर कर सकता है।
ब्लड बैंक जांच से जुड़ी याचिका भी खारिज
इसी दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक अन्य याचिका पर भी सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसमें सभी ब्लड बैंकों में अनिवार्य न्यूक्लिक एसिड एम्प्लीफिकेशन टेस्टिंग लागू करने की मांग की गई थी।
इस पर पीठ ने कहा कि अदालत को यह दिखावा क्यों करना चाहिए कि वह मेडिकल साइंस की विशेषज्ञ है।
डेटा संरक्षण कानून पर केंद्र को नोटिस
दूसरी ओर, अदालत ने Digital Personal Data Protection Act, 2023 के एक प्रावधान की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली नई याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है।
अदालत ने इस याचिका को पहले से लंबित मामलों के साथ जोड़ते हुए 23 मार्च को अगली सुनवाई तय की है।
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