
संयुक्त राष्ट्र । विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर (External Affairs Minister Dr. S. Jaishankar) ने कहा कि मानवाधिकारों के लिए (For Humanrights) विकास और क्षमता निर्माण का (To Development and Capacity Building) व्यापक नजरिया आवश्यक है (Comprehensive Approach is Essential) ।
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मानवाधिकारों के लिए ऐसे नजरिए की अपील की है, जिससे सबसे कमजोर लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी में ठोस सुधार हो और राजनीतिकरण, चुनिंदा सोच या दोहरे मापदंड के बजाय आतंकवाद का सामना किया जा सके। जिनेवा में मानवाधिकार परिषद से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए बात करते हुए विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, “संघर्ष, ध्रुवीकरण और अनिश्चितता से भरी दुनिया में, भारत कॉमन ग्राउंड ढूंढना और उसे बढ़ाना चाहता है। हमने हमेशा टकराव के बजाय बातचीत, बंटवारे के बजाय आम सहमति और छोटे हितों के बजाय इंसानी विकास पर जोर दिया है।” उन्होंने कहा कि यूएन और मानवाधिकार परिषद को मानवाधिकार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पूरी तरह से समझने के लिए उन्हें आतंकवादी कामों के खिलाफ जीरो-टॉलरेंस की वकालत करनी चाहिए।
डॉ. जयशंकर ने कहा, “आतंकवाद मानवाधिकार के सबसे बड़े उल्लंघनों में से एक है, और इसका कोई औचित्य नहीं हो सकता, खासकर जब बेगुनाह लोगों की जिंदगी को निशाना बनाया जाता है।” बता दें, भारत अक्टूबर में सातवीं बार मानवाधिकार परिषद के लिए सेतु निर्माता बनने के वादे के साथ चुना गया था। जनरल असेंबली में डाले गए 188 वोटों में से 177 वोटों के साथ भारत को भारी बहुमत मिला।
एस जयशंकर ने कहा, “हमारा मैंडेट अंतरराष्ट्रीय समुदाय, खासकर वैश्विक दक्षिण के साझेदारों के भरोसे और उम्मीदों को दिखाता है। भारत परिषद में इस यकीन के साथ आ रहा है कि मानवाधिकारों को आगे बढ़ाने का सबसे प्रभावी तरीका संवाद, क्षमता-निर्माण और वास्तविक साझेदारी है, न कि उसका राजनीतिकरण, चयनात्मक दृष्टिकोण या दोहरे मापदंड।” उन्होंने कहा कि मानवाधिकार के बारे में भारत का विजन “इस समझ पर आधारित है कि किसी भी इलाके की असुरक्षा या किसी भी समूह का अलग-थलग होना, आखिरकार सभी के अधिकारों और भलाई को कमजोर करता है।” ईएएम ने अपने संबोधन के दौरान मानवाधिकार पर कम ध्यान देने को लेकर कुछ पश्चिमी देशों और संस्थाओं की इशारों-इशारों में आलोचना भी की।
मानवाधिकारों पर भारत के बड़े नजरिए को समझाते हुए जयशंकर ने कहा, “हम एक विकासशील देश के तौर पर अपने अनुभव से यह बात कह रहे हैं, जिसने गरीबी और बाहरी झटके देखे हैं और फिर भी लोकतंत्र, बहुलवाद और सामाजिक न्याय का रास्ता चुना है।” तकनीक और मानवाधिकार पर चल रही बहस और दुनिया भर में विभाजन और बिगड़ने के खतरों के बीच, ईएएम जयशंकर ने कहा, “तकनीक मानवाधिकार के लिए एक फोर्स मल्टीप्लायर हो सकती है और होनी भी चाहिए, न कि एक नई फॉल्ट लाइन।”
भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) का उदाहरण देते हुए, उन्होंने कहा कि देश “बहुत बड़े पैमाने पर मानवीय क्षमता को विकसित करने में निवेश कर रहा है। इससे करोड़ों लोगों को पारदर्शिता और कम से कम लीकेज के साथ कल्याणकारी लाभ, वित्तीय सेवा और पब्लिक स्कीम्स तक पहुंचने में मदद मिली है,” और भारत दुनिया भर की जनता की भलाई के लिए अपनी जानकारी शेयर कर रहा है। उन्होंने कहा, “महामारी, क्लाइमेट चेंज, भू-राजनीतिक और आर्थिक तनाव के खतरनाक असर ने मौजूदा असमानताओं को और बढ़ा दिया है।”
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