लाहौर। पाकिस्तान (Pakistan) में फील्ड मार्शल आसिम मुनीर (Asim Munir) की शक्तियों को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। संसद के उच्च सदन में कुछ ही घंटों के भीतर ‘डिफेंस फोर्सेस ऑफ पाकिस्तान एक्ट 2026’ (‘Defence Forces of Pakistan Act 2026’) पारित होने के बाद देश की सैन्य कमान का बड़ा हिस्सा मुनीर के हाथों में केंद्रित हो गया है। कानून के तेजी से पारित होने को लेकर पाकिस्तान में लोकतांत्रिक संस्थाओं और संसद की भूमिका पर भी बहस शुरू हो गई है।
नए कानून के बाद आसिम मुनीर पाकिस्तान के सैन्य ढांचे में पहले से कहीं अधिक प्रभावशाली स्थिति में पहुंच गए हैं। वह एक साथ तीन महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। नए प्रावधानों के तहत बतौर चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेस (CDF) उन्हें तीनों सेनाओं के बीच ऑपरेशनल कमान और समन्वय में बड़ी भूमिका मिल गई है।
इसके अलावा सेना, नौसेना और वायुसेना के अधिकारियों के संबंध में भी उन्हें व्यापक अधिकार दिए गए हैं। सेना प्रमुखों को छोड़कर तीनों सेवाओं के अधिकारियों को समय से पहले रिटायर या बर्खास्त करने की शक्ति भी नए ढांचे का हिस्सा बताई जा रही है।
नए कानून के तहत चेयरमैन जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ का पद समाप्त कर दिया गया है। इसकी जगह सैन्य कमान की नई व्यवस्था तैयार की गई है। नेशनल स्ट्रैटेजिक कमान की जिम्मेदारी जनरल आमिर रजा को दी गई है, जबकि आर्मी रॉकेट फोर्सेज कमान भी थल सेना के नियंत्रण में रहेगी।
नए डिफेंस हेडक्वार्टर के गठन के बाद आलोचकों का कहना है कि पाकिस्तान की सैन्य व्यवस्था में थल सेना का प्रभाव और मजबूत हो गया है।
आसिम मुनीर का प्रभाव केवल सैन्य व्यवस्था तक सीमित नहीं माना जा रहा। पाकिस्तान में पहले से ही सेना की राजनीतिक भूमिका को लेकर बहस चलती रही है। नए कानून के बाद सैन्य सत्ता के और अधिक केंद्रीकरण की आशंका ने इस बहस को फिर हवा दे दी है।
यही वजह है कि कुछ विश्लेषक इसे पाकिस्तान में संभावित मार्शल लॉ जैसे हालात की दिशा में बढ़ते कदम के तौर पर देख रहे हैं। हालांकि, कानून के पारित होने मात्र से यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि पाकिस्तान में औपचारिक रूप से मार्शल लॉ लागू हो गया है।
पाकिस्तान के सैन्य ढांचे में इस बदलाव का असर भारत की सुरक्षा रणनीति पर भी पड़ सकता है। खास तौर पर मिसाइल और रणनीतिक हथियारों से जुड़े कमान ढांचे के अधिक केंद्रीकृत होने पर भारत की नजर रहेगी।
पाकिस्तान आर्थिक संकट और भारी कर्ज के बावजूद अपने मिसाइल कार्यक्रम तथा रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने पर जोर दे रहा है। ऐसे में सैन्य कमान के केंद्रीकरण से उसकी रणनीतिक निर्णय प्रक्रिया में तेजी आने की संभावना जताई जा रही है।
वहीं भारत में थियेटराइजेशन और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) से जुड़े ढांचे पर काम जारी है। ऐसे में पाकिस्तान के नए सैन्य कमान मॉडल को भारत के लिए रणनीतिक चुनौती के तौर पर भी देखा जा रहा है।
आसिम मुनीर का मौजूदा प्रभाव पाकिस्तान की राजनीति में हुए बड़े बदलावों के बीच सामने आया है। इमरान खान के कार्यकाल में उन्हें आईएसआई प्रमुख के पद से हटाया गया था। बाद के वर्षों में पाकिस्तान की राजनीति और सेना के भीतर समीकरण तेजी से बदले और आज मुनीर देश की सैन्य व्यवस्था में सबसे प्रभावशाली चेहरों में शामिल हैं।
नए कानून के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पाकिस्तान में सैन्य ताकत का यह केंद्रीकरण आने वाले दिनों में राजनीतिक व्यवस्था को और कमजोर करेगा? यही मुद्दा अब देश के भीतर और बाहर दोनों जगह चर्चा का विषय बना हुआ है।
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