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बस ट्रक बॉडी बिल्डर्स की आवाज बनी कांग्रेस गडकरी संग बैठक में उठे बड़े मुद्दे..

March 19, 2026

नई दिल्ली:  देश की राजनीति और उद्योग जगत के बीच एक अहम कड़ी (connection) उस समय देखने को मिली जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी(Leader of the Opposition Rahul Gandhi) ने अपनी बहन और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा (Congress MP Priyanka Gandhi Vadra) के साथ केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी(Minister Nitin Gadkari) से मुलाकात (meeting) की।इस बैठक का केंद्र बस और ट्रक निकाय निर्माण उद्योग (industry) से जुड़ी समस्याएं रहीं, जिसमें राजस्थान(Rajasthan)के इस क्षेत्र से जुड़े मुद्दों ने भी भाग लिया।
बैठक के दौरान राहुल गांधी ने उद्योग से जुड़े प्रतिनिधिमंडल की चिंताओं को विस्तार से गडकरी के सामने रखा उन्होंने बताया कि मंत्रालय के नए नियम और तकनीकी मानकों के कारण बस और ट्रक बॉडी निर्माताओं को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है खासकर छोटे और मध्यम स्तर के उद्योगों के लिए इन नियमों का पालन करना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है

सूत्रों के अनुसार उद्योग जगत ने उत्पादन लागत में लगातार बढ़ोतरी लाइसेंस प्रक्रिया में अधिक खर्च और समय तथा अनुपालन से जुड़ी जटिलताओं जैसे मुद्दों पर गंभीर चिंता जताई प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि यदि इन समस्याओं का जल्द समाधान नहीं किया गया तो कई छोटे निर्माता बाजार से बाहर हो सकते हैं जिससे बड़ी संख्या में लोगों की आजीविका प्रभावित होगी

बताया गया कि इस बैठक से पहले भी इन प्रतिनिधियों ने राहुल गांधी से मुलाकात कर अपनी समस्याओं को विस्तार से रखा था जिसके बाद उन्होंने इस मुद्दे को सरकार के समक्ष उठाने का निर्णय लिया बैठक में यह भी जोर दिया गया कि उद्योग को बढ़ावा देने के लिए व्यावहारिक और संतुलित नीतियों की जरूरत है ताकि सुरक्षा मानकों के साथ साथ छोटे व्यवसायों का अस्तित्व भी बना रहे

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना और भरोसा दिलाया कि उनकी समस्याओं पर सकारात्मक रूप से विचार किया जाएगा बैठक के बाद प्रियंका गांधी ने कहा कि खास तौर पर लाइसेंस प्रक्रिया में लगने वाला समय और खर्च उद्योग के लिए बड़ी बाधा है जिस पर मंत्री ने शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया है


  • इस मुलाकात को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है जब देश में छोटे और मध्यम उद्योगों को लेकर नीतिगत चर्चाएं तेज हैं और सरकार से उम्मीद की जा रही है कि वह विकास और नियमन के बीच संतुलन बनाए रखेगी फिलहाल इस बैठक के बाद उद्योग जगत को राहत की उम्मीद जरूर जगी है लेकिन अब नजर इस बात पर रहेगी कि इन आश्वासनों को जमीन पर कब और कैसे उतारा जाता है

     

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