
नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार (International market)में कच्चे तेल (Crude oil)की कीमतों में तेज उछाल ने भारत समेत दुनिया के कई तेल आयातक देशों की चिंता बढ़ा दी है। सऊदी अरब पर हमलों और पश्चिम एशिया (West Asia)में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर तेल की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका गहरा गई है। गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 113 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया जबकि अमेरिकी कच्चा तेल डब्ल्यूटीआई करीब 99 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता रहा। तेल की कीमतों में आई इस तेजी का असर आने वाले दिनों में पेट्रोल डीजल की कीमतों और महंगाई पर पड़ सकता है। हालांकि घरेलू बाजार में ईंधन के दाम बढ़ेंगे या नहीं इसका फैसला तेल कंपनियों और सरकार की नीतियों समेत कई कारकों पर निर्भर करेगा।
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के पीछे पश्चिम एशिया में बढ़ता सैन्य तनाव प्रमुख वजह माना जा रहा है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक ईरान समर्थित हूती लड़ाकों ने सऊदी अरब के लाल सागर स्थित यनबू बंदरगाह के अलावा एक तेल क्षेत्र और हवाई अड्डे पर हमलों का दावा किया है। इन घटनाओं ने तेल उत्पादन और निर्यात से जुड़े बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। सऊदी अरब वैश्विक तेल आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में उसके तेल ठिकानों या निर्यात केंद्रों पर किसी बड़े हमले से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।
इस साल अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 85 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी होने की बात रिपोर्ट में कही गई है। डीजल जैसे तैयार पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में भी भारी तेजी दर्ज की गई है। इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास तनाव ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के लिए तेल और गैस की आपूर्ति का अहम रास्ता है। यहां जहाजों की आवाजाही बाधित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की उपलब्धता और कीमतों पर व्यापक असर पड़ सकता है।
कच्चे तेल की महंगाई का भारत पर सीधा असर पड़ने की आशंका इसलिए भी अधिक है क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने पर भारत का आयात बिल बढ़ता है और इससे विदेशी मुद्रा पर दबाव पड़ सकता है। परिवहन और माल ढुलाई की लागत बढ़ने से खाद्य पदार्थों समेत दूसरी वस्तुओं की कीमतों पर भी असर पड़ने की आशंका रहती है। रिपोर्ट के मुताबिक कच्चे तेल के प्रति बैरल भाव में 10 डॉलर की बढ़ोतरी से तेल कंपनियों को करीब छह रुपये प्रति लीटर के बराबर लागत का दबाव पड़ सकता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि पेट्रोल और डीजल के खुदरा दाम भी स्वतः छह रुपये बढ़ जाएंगे।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को व्हाइट हाउस में बातचीत के दौरान दावा किया कि अमेरिका ने ईरान को काफी कमजोर कर दिया है। उन्होंने आगे भी कार्रवाई के संकेत दिए। इस बीच फारस की खाड़ी से कच्चे तेल की आवाजाही में कुछ सुधार के बावजूद पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति सीमित रहने की खबरें सामने आई हैं। रूस की रिफाइनरियों पर यूक्रेन के हमलों ने भी ईंधन बाजार पर दबाव बढ़ाया है। स्थिति से निपटने के लिए कुछ सरकारें अपने रणनीतिक भंडार से ईंधन जारी कर रही हैं।
कुल मिलाकर कच्चे तेल की कीमतों में आगे की चाल पश्चिम एशिया में संघर्ष की स्थिति सऊदी अरब के तेल प्रतिष्ठानों की सुरक्षा और प्रमुख समुद्री मार्गों से आपूर्ति सामान्य रहने पर निर्भर करेगी। भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर फिलहाल किसी निश्चित बढ़ोतरी का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी लेकिन लंबे समय तक तेल महंगा बना रहा तो देश की अर्थव्यवस्था और आम उपभोक्ताओं के बजट पर दबाव बढ़ सकता है।
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