
लखनऊ। अयोध्या (Ayodhya) स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर (Shri Ram Janmabhoomi Temple) में चढ़ावे की चोरी और गबन मामले की सुनवाई सोमवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में होगी। उत्तर प्रदेश सरकार (Government of Uttar Pradesh) अदालत के निर्देशों के अनुरूप नई विशेष जांच टीम (SIT) के गठन के लिए तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नाम प्रस्तुत कर सकती है।
सूत्रों के मुताबिक, प्रस्तावित टीम में लखनऊ रेंज की आईजी किरण एस, अयोध्या के डीआईजी सोमेन वर्मा और अयोध्या के एसएसपी गौरव ग्रोवर के नाम शामिल हैं। सरकार इन अधिकारियों का पैनल सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पेश करेगी, जिसके बाद अदालत नई एसआईटी के गठन पर निर्णय ले सकती है।
पहले की SIT में हो सकता है बदलाव
इस मामले की जांच के लिए पहले गठित एसआईटी में लखनऊ मंडल के तत्कालीन आयुक्त विजय विश्वास पंत और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन कुमार शामिल थे। अब सरकार इन दोनों अधिकारियों की जगह दो आईपीएस अधिकारियों को शामिल करने का प्रस्ताव लेकर अदालत पहुंच रही है।
गौरतलब है कि मंदिर के चढ़ावे में मिले आभूषणों के कथित गबन की जांच के बाद एफआईआर दर्ज की गई थी और मामले में कई आरोपियों की गिरफ्तारी भी हुई थी। विवाद के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय और ट्रस्ट के एक अन्य प्रमुख पदाधिकारी अनिल मिश्रा ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था।
पुराने पहचान पत्रों से फिर मिलेगी मंदिर में एंट्री
इधर, मंदिर प्रशासन ने निर्माण कार्यों को प्रभावित होने से बचाने के लिए एक अंतरिम फैसला लिया है। हाल ही में अमान्य घोषित किए गए चंपत राय के हस्ताक्षर वाले पुराने पहचान पत्र और प्रवेश पास फिलहाल अस्थायी रूप से फिर से मान्य कर दिए गए हैं। नई पास व्यवस्था लागू होने तक अधिकृत कर्मचारी, इंजीनियर और तकनीकी अधिकारी इन्हीं पुराने पहचान पत्रों के आधार पर मंदिर परिसर में प्रवेश कर सकेंगे।
निर्माण कार्य प्रभावित होने पर लिया गया फैसला
ट्रस्ट में नेतृत्व परिवर्तन के बाद पुराने पहचान पत्रों से प्रवेश पर रोक लगा दी गई थी। इसके चलते एलएंडटी, टाटा, इंडिया इंजीनियर्स लिमिटेड और उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम सहित विभिन्न एजेंसियों के इंजीनियरों और कर्मचारियों को परिसर में प्रवेश में दिक्कतें आने लगी थीं।
मंदिर परिसर में चारदीवारी, संग्रहालय, ट्रस्ट कार्यालय और विश्राम गृह सहित कई निर्माण एवं विकास कार्य चल रहे हैं। इन्हीं परियोजनाओं की निगरानी और समन्वय प्रभावित होने के कारण प्रशासन ने नई पहचान पत्र व्यवस्था लागू होने तक पुराने पासों को अंतरिम रूप से वैध रखने का निर्णय लिया है।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved