
मुख्यमंत्री पर भी कसा तंज, जनता के सामने हो सुनवाई, भागीरथपुरा की व्यवस्था को सुधारने की बजाय घंटा की लड़ाई पर उलझी व्यवस्था, उचित दंड मिले
इंदौर। पूर्व मुख्यमंत्री (Former Chief Minister) और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) ने ट्वीट करते हुए कहा कि इंदौर (Indore) मेरे बचपन का शहर (childhood city) है और सबसे विकसित और सबसे स्वच्छ शहर होने के साथ प्रदेश की आर्थिक राजधानी भी इसे कहा जाता है, लेकिन उसी शहर में 18 लोग गंदा पानी पीने से मर जाते हैं। मौत की गिनती बढऩे पर जिम्मेदारी की टोपी सबने एक-दूसरे को पहनाना शुरू कर दी। इस पूरे हादसे की न्यायिक जांच होना चाहिए और हाईकोर्ट के सीटिंग जज से इसकी जांच कराई जाए और पब्लिक यानी जनता के सामने इसकी सुनवाई भी हो।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी भागीरथपुरा का दौरा किया, तो सिंघार ने शहर के सभी वार्डों में घूम-घूमकर पानी के नमूने भी एकत्रित किए। इसकी जांच करवाने के साथ विधानसभा में पूरी रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी, वहीं प्रदेश अध्यक्ष पटवारी ने भी शहर के नागरिकों के नाम एक चिट्ठी लिखी, जिसमें उन्होंने इंदौरियों के लिए दिल हमेशा धडक़ने और एक बेटे द्वारा सीधी और सच्ची बातचीत करने की बात कही गई है। अपने पत्र में पटवारी ने कहा कि जिनकी लापरवाही से इतनी मौतें हुईं, उनसे सवाल पूछना हर एक का लोकतांत्रिक अधिकार है। भागीरथपुरा के परिवारों की तरह ही सभी बस्तियों और शहरभर के लोगों को साफ पानी पिलाने का जिम्मा जिस नगर निगम पर है, वहां सालों से भाजपा ही सत्ता में काबिज है। इंदौरियों ने वर्षों तक भाजपा को एकतरफा समर्थन दिया, तो क्या आज निर्दोष नागरिक उसका मूल्य अपनी जान देकर चुकाएंगे। यह लड़ाई सत्ता पाने की नहीं, इंसाफ है और पीडि़तों के साथ हम खड़े रहेंगे और इंदौर चूंकि मां अहिल्या की न्याय प्रिय नगरी है, इसलिए दोषियों की जवाबदेही तय कराने और उन्हें सजा मिलना चाहिए, तब ही भागीरथपुरा को इंसाफ मिलेगा। दूसरी तरफ अपने बयानों से चर्चा में रहने वाले दिग्विजय सिंह ने अपने एक्स हैंडल पर भी लिखा कि मौत का आंकड़ा 2-4 तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि लगातार बढ़ता रहा, जिसके चलते जिम्मेदारी की टोपी सब एक-दूसरे को पहनाने में जुटे रहे और घंटा की लड़ाई पर भी व्यवस्था उलझ गई। उन्होंने मुख्यमंत्री पर भी तंज कसते हुए कहा कि वे हर दूसरे दिन इंदौर आते हैं, तो क्या मौत का मुआवजा देकर चुप रहेंगे?
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