
नई दिल्ली । धुरंधर द रिवेंज यानी धुरंधर 2(Dhuranthar 2) आखिरकार सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है और इसके साथ ही दर्शकों के बीच लंबे समय से बना उत्साह भी अब परखा जा रहा है। पहले पार्ट की जबरदस्त सफलता के बाद इस सीक्वल (Sequel)से उम्मीदें काफी ऊंची थीं। एडवांस बुकिंग से लेकर सोशल मीडिया (Social Media)तक फिल्म का क्रेज साफ दिख रहा था, लेकिन रिलीज (Release) से पहले कुछ शहरों में प्रीव्यू शो (Preview Show) कैंसल होने से दर्शकों को निराशा भी झेलनी पड़ी। अब सवाल यही है कि क्या फिल्म उन उम्मीदों पर खरी उतरती है या नहीं।
करीब चार घंटे लंबी इस फिल्म को देखते हुए आप पूरी तरह निराश तो नहीं होते, लेकिन बीच-बीच में इसकी रफ्तार आपको जरूर थका देती है। कहानी को छह चैप्टर में बांटा गया है, जिसकी शुरुआत जसकीरत सिंह रांगी यानी रणवीर सिंह के किरदार के फ्लैशबैक से होती है। एक आम युवक से बदले की आग में जलते शख्स और फिर देश के लिए काम करने वाले एजेंट तक का उसका सफर दिलचस्प जरूर है, लेकिन इसे जिस तरह से खींचा गया है, वह फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी बन जाता है।
फिल्म में आर माधवन द्वारा निभाया गया आईबी डायरेक्टर अजय सान्याल का किरदार कहानी को मजबूती देने की कोशिश करता है, वहीं अर्जुन रामपाल और संजय दत्त जैसे कलाकार मौजूद तो हैं, लेकिन उनका इस्तेमाल उतना प्रभावी नहीं हो पाया है जितनी उम्मीद की गई थी। खासकर अर्जुन रामपाल का किरदार, जो पहले पार्ट में ज्यादा खतरनाक नजर आता था, इस बार कमजोर लिखा गया है।
पूरी फिल्म में रणवीर सिंह ही स्क्रीन पर छाए रहते हैं और यह कहना गलत नहीं होगा कि उन्होंने अपने किरदार में पूरी जान डाल दी है। एक्शन, इमोशन और गुस्से के हर सीन में उनकी पकड़ मजबूत नजर आती है। वहीं राकेश बेदी इस बार भी सरप्राइज पैकेज बनकर उभरते हैं और क्लाइमैक्स में खास प्रभाव छोड़ते हैं।
निर्देशक आदित्य धर ने फिल्म में रिसर्च और रियल घटनाओं के संदर्भ जोड़ने की कोशिश की है, जो कुछ जगहों पर दिलचस्प लगते हैं। हालांकि, जहां पहले पार्ट में कहानी टाइट और सरप्राइज से भरी हुई थी, वहीं इस बार स्क्रिप्ट बिखरी हुई नजर आती है। कई सीन ऐसे हैं जिनका अंदाजा पहले ही लगाया जा सकता है, जिससे रोमांच कम हो जाता है।
फिल्म की शुरुआत और क्लाइमैक्स जरूर दमदार हैं, लेकिन बीच का हिस्सा लंबा और थोड़ा बोरिंग लगता है। एक्शन सीन अच्छे हैं, लेकिन कई जगह उन्हें जरूरत से ज्यादा खींचा गया है। संगीत भी पहले पार्ट के मुकाबले कमजोर है और कोई गाना लंबे समय तक याद नहीं रहता।
कुल मिलाकर ‘धुरंधर 2’ एक ऐसी फिल्म है जिसे आप एक बार देख सकते हैं, खासकर अगर आपने इसका पहला पार्ट पसंद किया हो। लेकिन अगर आप पहले जैसी टाइट कहानी, जबरदस्त ट्विस्ट और लगातार एंटरटेनमेंट की उम्मीद लेकर जा रहे हैं, तो थोड़ा निराश हो सकते हैं।
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