
नई दिल्ली। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले जहाजों (Ships) पर कथित तौर पर भारी शुल्क (Charge) लगाए जाने की खबरों के बीच ईरान (Iran) को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि ईरान इस अहम समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों से करीब 20 लाख डॉलर तक का टोल वसूल सकता है। हालांकि, भारत सरकार (Government of India) ने इन अटकलों पर स्थिति स्पष्ट कर दी है।
भारत पर टोल लगाने के दावे पर सरकार की प्रतिक्रिया
सरकारी सूत्रों के मुताबिक भारत और ईरान के बीच इस तरह के किसी टोल या शुल्क को लेकर कोई बातचीत नहीं हुई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि इस विषय पर पूछे गए सवालों के बावजूद दोनों देशों के बीच ऐसा कोई समझौता या चर्चा नहीं हुई है। सरकार ने साफ किया कि फिलहाल ऐसी खबरें सिर्फ अटकलों पर आधारित हैं।
होर्मुज में शुल्क वसूली की तैयारी की चर्चा
रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान कथित तौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर ट्रांजिट शुल्क लगाने की योजना पर विचार कर रहा है। कहा जा रहा है कि यह प्रस्ताव संसद स्तर पर चर्चा में है और इसे औपचारिक मंजूरी भी मिल सकती है। यह शुल्क प्रति जहाज लाखों डॉलर तक हो सकता है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
ईरान और ओमान की भूमिका पर दावा
कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि इस समुद्री मार्ग पर ईरान और ओमान दोनों शुल्क वसूल सकते हैं। माना जा रहा है कि युद्धविराम और हालिया समझौतों के बाद इस क्षेत्र में नियंत्रण व्यवस्था को औपचारिक रूप दिया जा सकता है, जिससे ईरान को राजस्व का नया स्रोत मिल सके।
शिपिंग और ऊर्जा व्यापार पर असर की आशंका
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्गों में से एक है। अगर यहां किसी तरह का ट्रांजिट शुल्क लागू होता है, तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और शिपिंग लागत पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय व्यापार की लागत को भी प्रभावित कर सकता है।
युद्ध के दौरान भारत के जहाजों को मिली थी छूट
संघर्ष के दौरान ईरान ने कुछ मित्र देशों के जहाजों को सुरक्षित मार्ग से गुजरने की अनुमति दी थी। इनमें भारत का नाम भी शामिल बताया गया था। उस समय भारतीय जहाजों ने सुरक्षित रूप से तेल और एलपीजी की आपूर्ति जारी रखी थी।
अभी स्थिति पर निगाहें टिकीं
फिलहाल इस पूरे मामले पर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। भारत सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी प्रकार की फीस या टोल को लेकर ईरान के साथ कोई औपचारिक बातचीत नहीं हुई है।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved